Saturday , 27 June 2026

कितना सुरक्षित है हमारा शहर : भाग 2

  महाभारत काल की एक कथा है कौरवों और पांडवों के किशोरावस्था के समय की है। एक भवन बनाया जा रहा था भवन निर्माण इतना तेज था कि लगता था कि कुछ ही घंटो में भवन निर्माण पूर्ण हो जाएगा। महात्मा विदुर की नजर भवन निर्माण की सामग्री पर पड़ गई। सामग्री देखते ही विदुर समझ गए कि अगर इस भवन में आग लगी तो कुछ ही मिनट में यह भवन जलकर राख हो जाएगा और इस भवन में रहने वालों में से एक भी नहीं बचेगा। विदुर जी पांडवों से एक सवाल पूछते हैं कि “जंगल में आग लगती है तो कौन बचता है”। जवाब है चूहा कारण आग हमेशा ऊपर की तरफ बढ़ती है और चूहा हमेशा बिल बनाकर जमीन के अंदर रहता है। तो वह आसानी से भाग कर अपनी जान बचाने में सफल हो जाता है। और इस तरह विदुर की सुरंग बनाने की( बेसमेंट के रास्ते बाहर निकलने का रास्ता) की सलाह पांडवों को देते हैं।और लाक्षा ग्रह कांड में पांडवों की जान बच जाती है।

             पहले दिल्ली के एक होटल में नौ विदेशी नागरिको सहित 21 लोगो को अपनी जान गवानी पड़ी, फिर लखनऊ के एक कोचिंग में भयानक आग ने कई बच्चों की जान ले ली। पिछली बार जब क्विक न्यूज़ ने इस विषय पर कार्यक्रम किया था। तो खबर का असर हुआ कि तुरंत ही नगर परिषद आयुक्त श्री शिकेश काकरिया ने टीमे  गठित की और कुचामन की सभी होटलों की जांच के आदेश दिए। हम भी अपने स्तर पर मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के सहयोग से सभी बहुमंजिला ईमारतो और व्यावसायिक स्थलों की पड़ताल कर रहे थे। 

            किसी भी होटल प्राइवेट चिकित्सालय स्कूल या कोचिंग सेंटर में अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और थे भी तो नाकाफी यानी छोटे सिलेंडर जो की मुश्किल ढाई सौ से 500 वर्ग फुट की आग बुझा सकते हैं। और कई बार तो इसे भी बुझाने में यह सिलेंडर फेल हो जाते हैं।दरअसल इन बड़े व्यावसायिक स्थलों के लिए बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और होटलों में आग बुझाने और बचाव के लिए एक बहुस्तरीय व्यवस्था (Multi-layered Fire Safety System) अपनानी पड़ती है。 इसमें अग्निशमन उपकरणों की स्थापना (Fire Extinguishers), स्प्रिंकलर (Sprinklers) व अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकासी (Evacuation) की योजना, और नियमित मॉक ड्रिल (Fire Drills) शामिल है l इन परिसरों में अग्नि सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित कदम उठाने पड़ते हैं:

1. आधुनिक अग्निशमन उपकरणों की स्थापनाबड़े भवनों में आग को तुरंत काबू करने के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरणों का जाल बिछाया जाता है:ऑटोमैटिक फायर स्प्रिंकलर सिस्टम (Automatic Sprinkler System): छत पर लगे ये सिस्टम एक निश्चित तापमान (आमतौर पर 68°C) तक पहुंचने पर अपने आप पानी की बौछार शुरू कर देते हैं。फायर हाइड्रेंट सिस्टम (Fire Hydrant System): बड़े भवनों के हर फ्लोर पर पानी के पाइप, होज रील और वाल्व होते हैं, जिनसे जरूरत पड़ने पर तेज प्रेशर से पानी फेंका जा सकता है。पोर्टेबल फायर एक्सटिंग्विशर (Portable Fire Extinguishers): हर मंजिल पर आग के प्रकार (जैसे- लकड़ी/कागज के लिए Water, बिजली के लिए CO₂, और किचन के तेल के लिए Foam/Chemical) के अनुसार अग्निशामक सिलेंडर लगाए जाते हैं。ऑटोमैटिक किचन सप्रेशन सिस्टम (Commercial Kitchen Systems): होटलों के किचन में आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है, इसलिए वहाँ विशेष ऑटोमैटिक केमिकल फायर सप्रेशन सिस्टम लगाए जाते है l

2. फायर अलार्म और डिटेक्शन सिस्टम (Early Detection)स्मोक और हीट डिटेक्टर (Smoke & Heat Detectors): पूरे कॉम्प्लेक्स और कमरों में धुएं या गर्मी को भांपने वाले सेंसर लगाए जाते है l मैनुअल कॉल पॉइंट (Manual Call Points): आग दिखने पर अलार्म बजाने के लिए जगह-जगह ‘Break Glass’ स्विच लगाए जाते हैl पब्लिक एड्रेस सिस्टम (Public Address System): आपातकाल में सभी लोगों तक सुरक्षित बाहर निकलने के निर्देश प्रसारित (broadcast) करने के लिए स्पीकर लगाए जाते हैl

3. आपातकालीन निकासी और संरचनात्मक सुरक्षा (Evacuation & Escape)स्पष्ट निकास मार्ग (Emergency Exits): सीढ़ियों और निकास द्वारों को हमेशा स्पष्ट रखा जाता है。 मुख्य द्वारों पर आग-प्रतिरोधी (Fire-rated) दरवाजे होने चाहिए जो धुएं और लपटों को रोक सकें。आपातकालीन लाइटें (Emergency Signage): बिजली कट जाने पर भी चमकने वाले ‘Exit’ बोर्ड लगाए जाते हैं ताकि लोग रास्ता न भटकेl लिफ्ट का उपयोग निषेध: आग लगने की स्थिति में लिफ्ट की जगह हमेशा ‘फायर स्टेयर्स’ (सीढ़ियों) का उपयोग करना चाहिये l

4. वाटर स्टोरेज और पंपिंग सिस्टम बड़े कॉम्प्लेक्स में पानी की भारी आवश्यकता को देखते हुए अलग से भूमिगत (Underground) या ओवरहेड पानी की टंकियां बनाई जाती हैंl इसके साथ ही इलेक्ट्रिक पंप, डीजल पंप और जॉकी पंप लगाए जाते हैं जो आपातकाल में पानी के प्रेशर को बनाए रखते हैl

5. प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियांस्टाफ ट्रेनिंग (Staff Training): होटल और कॉम्प्लेक्स के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि आग लगने पर लोगों को कैसे सुरक्षित निकाला जाए और फायर एक्सटिंग्विशर का उपयोग (P.A.S.S. विधि) कैसे किया जाए l फायर एनओसी (Fire NOC): स्थानीय अग्नि शमन विभाग (Fire Brigade) से सुरक्षा मानकों की जांच करवाकर ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ प्राप्त करना अनिवार्य होता है l नियमित मॉक ड्रिल: कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए समय-समय पर अभ्यास (Drill) करना चाहिएl आधुनिक भवनों में आग की प्रारंभिक अवस्था में ही उसे नियंत्रित करने के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, ताकि अग्निशमन विभाग (Fire Brigade) के पहुंचने तक नुकसान को कम किया जा सके l

            बहरहाल नगर परिषद की टीमों द्वारा निरीक्षण के दौरान कहीं भी पूरी तरह से सुरक्षा का इंतजाम नहीं मिला। तो  सभी संस्थाओं को नगर परिषद द्वारा 15 दिन का समय देते हुए नोटिस दिया गया। दोस्तों 15 दिन भी बीत चुके हैं लेकिन इस विषय पर कोई भी गंभीर दिखाई नहीं देता है। दोस्तों लखनऊ का जो अग्निकांड हुआ था उसमें फायर एग्जिट का नितांत अभाव था फायर एग्जिट यानी आग लगने पर बाहर निकालने का रास्ता। हमने पहले आपको जो कहानी सुनाइ है महात्मा विदुर की उसके अनुसार फायर एग्जिट होना जरूरी है। यदि आग लग जाती है तो सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता होना अत्यंत आवश्यक है। 

             कुचामन के जितने भी संस्थाओं की हमने जांच  पड़ताल किसी में भी फायर एग्जिट की स्थिति नहीं है। और ना ही नगर परिषद ने दोबारा इनकी जांच करना जरूरी समझा है। क्विक न्यूज़ और मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के मुन्नालाल ने संयुक्त रूप से कुचामन के सबसे बड़े और सरकारी जिला अस्पताल की भी जांच की। आश्चर्यजनक स्थिति सामने आई। इतने बड़े टीम सौ बेड के जिला अस्पताल की सुरक्षा मात्र 2 किलो के 10 सिलेंडरों के भरोसे थी.। यानी यदि आग लग जाए ईश्वर के भरोसे ही रहना पड़ेगा। क्योंकि अस्पताल पहुंचने के लिए फायर ब्रिगेड को अतिक्रमण और अवैध पार्किंग से जूझना पड़ता है। बहरहाल हमने पीएमओ डॉ बलवीर ढाका से इस संबंध मे बात की तो पता लगा की काफ़ी समय पहले ही चिकित्सा अधिकारीयों को इस संबंध मे सूचित किया जा चूका है। लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हो पाई है।

               वही एक और स्थान पर इतनी भयंकर लापरवाही देखने को मिली की कल्पना नहीं की जा सकती। कुचामन का हृदय स्थल पुराने बस स्टैंड के पास लायन सर्किल पर राजदयाल मॉल के सामने कुचामन के सबसे अधिक लोकप्रिय दो रेस्टोरेंट सेवदा कचोरी और न्यू लक्ष्मी रेस्टोरेंट स्थित हैं। इन दोनों रेस्टोरेंट पर पूरे दिन लगभग 8 से 10 गैस सिलेंडर चालू रहते हैं। और आश्चर्यजनक बात है कि काफी वर्षों से इनके ऊपर की मंजिल पर शहर के प्रसिद्ध स्कूल एलबीएस स्कूल चल रही है। मान लिया कि स्कूल संचालक का निजी फायदा है। इसलिए वह इस पर ध्यान नहीं देते लेकिन क्या प्रशासन को इतनी बड़ी लापरवाही दिखाई नहीं देती। और अभिभावक कैसे अपने लाडले को इस तरह से छोड़ सकता है। 

            इनके अलावा पिछले कार्यक्रम में हमने कई ऐसे होटल, गेस्ट हाउस,कॉम्प्लेक्स आदि बताए थे  जिनमे आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड का पहुंचना नामुमकिन है। (देखिए हमारा पिछला कार्यक्रम।) दोस्तों अब सवाल बनता है  हमारे मंत्री महोदय से जो कि हमारे यहां के विधायक है। नगर परिषद प्रशासन से आदि से जिन्हे इतनी बड़ी लापरवाही दिखाई नहीं देती। और तो और विपक्ष जो कभी भी इन खामियों पर ध्यान नहीं देता है। कम से कम विपक्ष को तो इस पर आपणी आवाज़ उठानी चाहिए ताकि शहर को सुरक्षित किया जा सके।

             दोस्तों क्विक न्यूज़ आप सभी से गुजारिश करता है कि इस लापरवाही पर कमेंट सेक्शन में आकर अधिक से अधिक कमेंट करें ताकि प्रशासन को मजबूर होना पड़े इस लापरवाही पर काबू पाने में। प्रशासन को इतनी बड़ी लापरवाही दिखाई नहीं देती या फिर वह किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं।

About Manoj Bhardwaj

Manoj Bhardwaj
मनोज भारद्धाज एक स्वतंत्र पत्रकार है ,जो समाचार, राजनीति, और विचार-शील लेखन के क्षेत्र में काम कर रहे है । इनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना है और उन्हें उत्कृष्टता, सत्य, और न्याय के साथ जोड़ना है। इनकी विशेषज्ञता समाचार और राजनीति के क्षेत्र में है |

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