Tuesday , 4 August 2026

शिक्षा का व्यवसायीकरण क्यों : तो क्या निजी विद्यालय बंद कर दिए जाए

  गत 27 जुलाई को मकराना की सेंट एंसलम स्कूल में हुआ 3:30 साल की बच्ची के साथ कथित यौन दुराचार का मामला हो, या आए दिन बच्चों से भारी बाल वाहिनियों की दुर्घटना या फिर सरकारी पाठ्यक्रम के समानांतर निजी विद्यालय में चलता महंगा पाठ्यक्रम। कोई भी रास्ता ऐसा नहीं है कि निजी विद्यालयों की लूट उजागर न होती हो। अभी कल ही एक व्हाट्सएप ग्रुप में बहस चल रही थी। निजी विद्यालयों द्वारा की जाने वाली लूट पर। ऐसा नहीं है कि सरकारी विद्यालय में पढ़ाई नहीं होती हो हर शहर में एक न एक ऐसा सरकारी विद्यालय अवश्य मिलेगा जिसे आदर्श विद्यालय कहा जा सकता है। 

             मसलन हमारे कुचामन का ही पीएम श्री जवाहर उच्च माध्यमिक विद्यालय हर वर्ष अपना बेहतरीन परिणाम देता है। यही नहीं हर तरह की लग्जरी सुविधाएं भी इस विद्यालय में मौजूद है। मसलन पीने का फिल्टर ठंडा पानी,पूरा फर्नीचर, हवादार बड़े कमरे, हर कमरे में पर्याप्त पंखे ,पूरी सुविधाओं से युक्त प्रयोगशालाएं,बड़ा खेलने का मैदान और सबसे अधिक महत्वपूर्ण शिक्षा को समर्पित स्टाफ।  फिर भी क्या कारण है कि आम अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालय में पढ़ाना पसंद करते हैं। 

            मेरे ख्याल से यह सिर्फ देखा देखी की जाने वाली होड़ से ज्यादा कुछ भी नहीं है। आगे बढ़ने से पहले प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉक्टर जिलोया से हुई बातचीत सुनते हैं। डॉक्टर जिलोया के अनुसार किताबों का वजन होमवर्क की चिंता और शिक्षकों के दबाव के चलते बच्चा ऐसी कुंठाए पाल बैठता है जिसका परिणाम उसे आगे वह आने वाली उम्र में भुगतना पड़ता है। पड़ोसी देश नेपाल ने अपने देश में चलने वाली सभी प्राइवेट स्कूलों को एक आदेश के साथ ही बंद करवा दिया और इसके सकारात्मक परिणाम भी आए। आज नेपाल में हर वर्ग का बच्चा एक ही क्लास में  बराबर बैठ सकता है। फिर चाहे वह अमीर बाप की औलाद हो या गरीब बाप की। यह जो अमीर गरीब के बीच की खाई है जो बच्चों के दिमाग में बचपन से ही घर कर दी जाती है। इस एक विशेष कदम से पाटी जा सकती हैं। 

          बहरहाल और भी कई बातें हैं जो निजी विद्यालयों की मनमानी को उजागर करती है। मतलब पुरानी कंडम बसों का बाल वाहिनियों के रूप में संचालन। आए दिन कहीं ना कहीं बाल वाहिनियों की दुर्घटना के समाचार मिल ही जाते है। बच्चों को जानवरों की तरह बसों में बिठाया जाना। महंगा पाठ्यक्रम, महंगी फीस, पाठ्यक्रम की जहां तक बात की जाए। जितने रुपए में पाठ्यक्रम और गणवेश खरीदी जाती है उतने रुपए में एक साधारण परिवार का 2 महीने का खर्चा आसानी से चलाया जा सकता है।

          आइये अब हिसाब लगाते हैं एक बच्चे की पढ़ाई पर कितना खर्च बैठता है। मान लीजिए एक बच्चा मिडिल क्लास यानी पाँचवी क्लास का है तो उसका खर्च कितना होगा। 

1. फीस कम से कम 30000 से ₹40000 वार्षिक

2.     पाठ्यक्रम 10000 से 15000 

3.    ड्रेस               5000 

4.    बस खर्च 30000 से 35000 रूपये वार्षिक अन्य खर्च जिसमें एजुकेशनल टूर समारोह आदि होते हैं वह लगभग ₹20000 वार्षिक। मतलब कुल मिलाकर ₹1,00,000 से अधिक वार्षिक खर्च। 

           एक  छोटे बच्चों की पढ़ाई पर खर्च किया जाता है। जैसे जैसे क्लास बढ़ती है वैसे वैसे यह खर्च भी बढ़ता जाता है। इसके ठीक विपरीत सरकारी स्कूल में सब कुछ मुफ्त है। साथ ही सभी अध्यापक पूरी तरह से ट्रेंड होते हैं। क्योंकि बगैर योग्यता के कोई सरकारी अध्यापक बन ही नहीं सकता। कुछ विशेष लापरवाहीया जो निजी विद्यालय द्वारा बरती जाती है उन पर ना तो प्रशासन की ध्यान देता है ना ही अभिभावक। 

              अब देखिए अधिकतर निजी विद्यालयों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं के बराबर है। नेशनल बिल्डिंग कोड पार्ट 4 के अनुसार के अनुसार अग्नि सुरक्षा के अंतर्गत साफ तौर से निर्देशित किया गया है की प्रथम मंजिल पर छोटे अग्निशमन सिलेंडर से काम चलाया जा सकता है। लेकिन यदि मंजिले ज्यादा है तो पूरा अग्नि शमन प्लांट लगाना आवश्यक है। बहुत कम निजी विद्यालय होंगे जो एक मंजिल पर चलते होंगे। बाकी दो से अधिक मंजिलों पर ही चलते हैं। 90% निजी विद्यालय में अग्नि सुरक्षा के मामले में गंभीर नहीं है। यहां तक की एक विद्यालय जो कि कुचामन के पुराने बस स्टैंड पर संचालित है उसके नीचे तो बड़े-बड़े रेस्टोरेंट संचालित है। जिनमें प्रतिदिन 15 से 20 गैस सिलेंडर चलते हैं। लेकिन आज तक किसी का भी ध्यान उसे और नहीं गया है।  दूसरी लापरवाही बाल वाहिनियों से संबंधित है अधिकतर बालवाहिनिया बगैर फिटनेस के ही संचालित है। लेकिन ना तो पुलिस प्रशासन न ही परिवहन विभाग और ना ही अभिभावक इस और ध्यान देते हैं। दरअसल हमारे देश में शिक्षा को व्यापार का रूप दे दिया गया है और इसके हमें भविष्य में भयावह परिणाम देखने को मिलेंगे और अभी मिल भी रहे हैं।  

About Manoj Bhardwaj

Manoj Bhardwaj
मनोज भारद्धाज एक स्वतंत्र पत्रकार है ,जो समाचार, राजनीति, और विचार-शील लेखन के क्षेत्र में काम कर रहे है । इनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना है और उन्हें उत्कृष्टता, सत्य, और न्याय के साथ जोड़ना है। इनकी विशेषज्ञता समाचार और राजनीति के क्षेत्र में है |

Check Also

मकराना : साढ़े तीन वर्ष की बच्ची से दुष्कर्म के मामले ने पकड़ा तूल ,धरना प्रदर्शन जारी

मकराना में साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला लगातार तूल पकड़ता …