
कुचामन सिटी :- आज नामांकन वापसी की अंतिम तिथि को देखते हुए कुचामन सिटी से कुल 41 अभ्यर्थियों ने नाम वापस लिए वही नावां नगरपालिका में कुल 27 अभ्यर्थियों ने नाम वापस लिए। नाम वापसी की कार्रवाई के साथ ही अब निकाय चुनाव पूर्व की प्रक्रिया एक बार की पूर्ण हो चुकी है। अब 9 सितंबर को चुनाव होना है ऐसे में अब सभी अभ्यर्थी अपनी अपनी तरफ से पूरी तरह से मैदान में उतर गए हैं। कुछ घटनाक्रम चौंकाने वाले रहे मसलन वार्ड नंबर 32 के कांग्रेस के उम्मीदवार अब्दुल फैसल ने अपना नामांकन फॉर्म वापस ले लिया। मतलब वह नंबर वार्ड नंबर 32 में अब कांग्रेस की चुनौती समाप्त हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर पूरे शहर की नजर वार्ड नंबर 27 के नाटकीय घटनाक्रम पर रही। गौरतलब है कि वार्ड नंबर 27 से भारतीय जनता पार्टी ने रवि गट्टानी को अपना उम्मीदवार बनाया है।

वही महेश रामचंद्रका ने निर्दलीय के रूप में फॉर्म भरा था। महेश रामचंद्रका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने पहले उन्हें निर्देशित किया था की टिकट उन्हीं को दी जाएगी और वें अपनी तैयारी वार्ड मे शुरु करे और उन्होंने अपनी पूरी तैयारी वहां पर शुरू कर दी थी। लेकिन रामचंद्रका टिकट अंतिम समय पर काट दिया गया और इसके साथ ही रामचंद्रका ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना फॉर्म भर दिया। आज जब फार्म उठाने की अंतिम तारीख थी तो इससे पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रशासन की मदद लेकर महेश रामचंद्रका पर पूरा दबाव बनाया जाने लगा।

अब क्योंकि महेश रामचंद्रका ज़ब अपना पूरा मानस चुनाव लड़ने का बना चुके थे तो उन्होंने अपने आप को लोगों की नजरों से दूर कर लिया। यानी वें शहर छोड़कर किसी गुप्त स्थान पर चले गए। उसके बाद फिर महेश रामचंद्रका के अनुसार उनके घर पर कई बार पुलिस द्वारा दबिश डाली गई जिसके वीडियो आपके सामने पेश है। देखीऐ सी सी टीवी फुटेज अपनी पूरी स्क्रीन पर और आइये सुनते हैं खुद महेश रामचंद्रका की जुबानी पूरा घटनाक्रम। संलग्न वीडियो में।

अब दोस्तों जहां महेश रामचंद्रका खुद अपनी जुबानी बता रहे हैं कि उन पर दबाव बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा किस तरह प्रशासन की मदद ली गई। बात यही नहीं रुकती दोस्तों महेश रामचंद्रका के पुत्र साहिल को भी किसी पल्लव राय नाम के व्यक्ति द्वारा धमकियां दी गई जो कि आपने खुद नहीं रामचंद्रका की जुबानी सुन लिया है। साथ ही गौरतलब है कि रोहित गोदारा धमकी प्रकरण में भी महेश रामचंद्रका को धमकी दी गई थी। तो सुरक्षा के लिए उन्हें एक सुरक्षा गार्ड प्रशासन द्वारा उपलब्ध करवाया गया था। उस सुरक्षा प्रहरी को भी तुरंत प्रभाव से निलंबित करवा दिया गया।

तो सवाल यह उठता है दोस्तों की क्या इस तरह की कार्यवाही सीधे-सीधे लोकतंत्र की हत्या नहीं कहा जाएगा। जबकि चुनाव लड़ना श्री रामचंद्रका अधिकार है भारत के हर नागरिकता अधिकार है। श्री रामचंद्रका के अनुसार एक झूठी रिपोर्ट श्री महेश के खिलाफ प्रशासन को भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार श्री रवि गट्टानी के द्वारा उपखंड अधिकारी को दी गई जो कि आपकी पूरी स्क्रीन पर आप देख चुके हैं।
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