
शहर में आज यानी शुक्रवार को मोहर्रम का त्योहार पूरी अक़ीदत और एहतराम (श्रद्धा और सम्मान) के साथ मनाया गया। सभी मुख्य मोहल्ले से निकले 6 ताजिए एक साथ पूर्व निर्धारित मार्ग से गुजरते हुए कर्बला पहुंचे जहां परंपरागत तरीके से ताजियों को सैराब किया गया। गौरतलब है कि हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को खैराज़ ऐ अक़ीदत (श्रद्धा सुमन) पेश करने के लिए मोहर्रम का त्यौहार मनाया जाता है।

तो उसी परंपरा के अनुसार ढोल ताशौ की मातमी धुनो के बीच अक़ीदत मंदो ने खैराज़ ऐ अक़ीदत पेश की। वही सभी धर्म के लोगों ने जुलूस में शामिल होकर कूचा ऐ अमन की प्रसिद्ध गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की। जहां हिंदू समाज के लोग इस जुलूस में शामिल होकर एक खूबसूरत तस्वीर पेश कर रहे थे। वहीं सामाजिक संस्था महावीर इंटरनेशनल भी मिसाल पेश करने में पीछे नहीं रही।

“सबकी सेवा, सबको प्यार – जियो और जीने दो” के उद्देश्य से कार्य करने वाली संस्था महावीर इंटरनेशनल कुचामन सिटी द्वारा मुस्लिम समाज के ऐतिहासिक मोहर्रम ताजिया जुलूस के अवसर पर मदरसा इस्लामिया सोसाइटी, कुचामन के सदर सलीम कुरैशी, युवा नेता रफीक खान, हबीब सोलंकी, याकूब भाटी, नासीर एवं हारून कारीगर का आत्मीय स्वागत एवं सम्मान किया गया।

संस्था की ओर से अध्यक्ष वीर रामावतार गोयल, वीर अशोक गंगवाल, वीर संदीप, वीर निर्मल पांड्या, वीर तेजकुमार बड़जात्या, वीर सम्पत बगड़िया, वीर बलराम प्रधान एवं गोरधन गोयल ने सभी अतिथियों को दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया तथा कुचामन की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया।
इस अवसर पर मदरसा इस्लामिया सोसाइटी की ओर से भी वरिष्ठ सदस्य वीर तेजकुमार बड़जात्या का साफा पहनाकर सम्मान किया गया।

यह आयोजन सामाजिक समरसता, पारस्परिक सम्मान और सर्वधर्म सद्भाव की प्रेरणादायी मिसाल बना।शाम लगभग 5:00 बजे के आसपास सभी ताजिए पुरानी धान मंडी पहुंचे। अखाड़ों के युवाओं ने लाठी तलवार एवं पारंपरिक करतबो का प्रदर्शन किया। इससे पूर्व गुरुवार की रात कत्ल की रात मनाई गई।
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