
कुछ दिन पहले ही न्यायाधीश श्री सुंदरलाल खारोल द्वारा मानवाधिकार सुरक्षा संगठन प्रदेश अध्यक्ष श्री मुन्नालाल काछवाल की विवाहित स्थलों की पार्किंग व तेज आवाज में बजते डीजे पर आधारित याचिका पर फैसला सुनाया गया था। उस फैसले के अनुसार सभी विवाह स्थल संचालकों को यह निर्देश दिए गए थे कि अपने पार्किंग स्थल की व्यवस्था करें ताकि आमजन को इससे कोई तकलीफ ना हो। साथ ही यह भी कहा गया था कि रात्रि 10:00 बजे के बाद डीजे आदि नहीं बजाया जाए तथा निर्धारित 45 डेसिबल की आवाज पर ही डीजे को बजाया जाए ताकि ध्वनि प्रदूषण नहीं फैले।

लेकिन प्रस्तुत वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि विवाह स्थल संचालक न्यायालय के आदेशों को मजाक में उड़ाना बखूबी जानते हैं। प्रस्तुत वीडियो जीपीएस कैमरे से बनाए गए हैं तथा सभी में लोकेशन टाइम वगैरा स्पष्ट है। कल्याण मंडपम के चारों तरफ बेतरतीब तरीके से पार्क की गई गाड़ियों को आप स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। जबकि क्विक न्यूज़ में विवाह स्थल संचालक प्रतिनिधि से बात की तो उनका जवाब क्या था आप खुद सुनिए।

यहां संचालक स्पष्ट रूप से मान रहे हैं कि उनके यहां डीजे चल रहा है बात यही नहीं रुकती दोस्तों भवन संचालक यहां मंत्री श्री विजय सिंह चौधरी के उपस्थित होने की बात भी कर रहे हैं। दूसरा वीडियो देखिए जो की रात्रि 9:35 का है यहां मोबाइल डीजे अपने पूरे शबाब पर स्टेशन रोड पर धूम मचा रहा है। तो क्या स्पष्ट रूप से मान लिया जाए कि माननीय न्यायालय के आदेश प्रशासन की सख्ती इन विवाह स्थल और डीजे संचालकों के लिए कोई मायने नहीं रखते।

तो क्या यह मान लिया जाए कि आम जनता का जो आखिरी शरण स्थल न्यायपालिका है वहां से भी उन्हें निराशा ही मिलेगी। गौरतलब है कि मानवाधिकार आयोग सुरक्षा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष श्री मुन्नालाल काछवाल इस विषय को लेकर राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग भी कर चुके हैं। तो क्या अब इनके पास अंतिम उपाय इच्छा मृत्यु ही है। क्योंकि जब संचालक न्यायालय के आदेशों की ही खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं तो बाकी रह भी क्या जाता है।
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