
नमस्कार दोस्तों स्वागत है एक बार फिर से निजी स्कूल बनाम सरकारी स्कूल के लगातार चौथे एपिसोड में। दोस्तों आज बात करते हैं आरटीई यानी शिक्षा के अधिकार के अधिनियम के आड़ में की जाने वाली लूट की। शिक्षा के अधिकार नियम (RTE) के अंतर्गत प्रत्येक निजी स्कूलों को अपने समस्त प्रवेश के 25% छात्रों का निःशुल्क प्रवेश देना होता है। सी पर आधारित है आज का पोल खोल का नया एपिसोड। तो देखिए लाइक कीजिए सब्सक्राइब कीजिए और शेयर कीजिए। दोस्तों यह जो 25% छात्रों को निःशुल्क प्रवेश दिए जाते हैं। इनका पूरा पैसा सरकार वहन करती है। अभी इस सुविधा का निजी विद्यालय किस तरह दुरुपयोग करते हैं। आज का कार्यक्रम इसी पर आधारित है। इस विषय पर आएंगे हम कुछ देर बाद पहले आज की जानकारी दे दी जाए।

दोस्तों कल का दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया गया था। यानी कल भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्मदिन था और पूरे भारत में इस दिन अवकाश था। लाज़मी है सभी विद्यालय भी कल बंद रहे थे। लेकिन हमारे कूचा ऐ अमन के कुछ विद्यालय कल भी खुले थे। बात यही नहीं रुकती दोस्तों कुचामन के कई लोगों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एक बड़ी स्कूल की संचालिका संविधान की सबसे ज्यादा हिमायत करने वाली पार्टी कांग्रेस की बड़ी पदाधिकारी भी है। कल वो बड़ी स्कुल भी खुली थी।

बहरहाल अब आते हैं आज के मुख्य विषय पर दोस्तों कुचामन सब्जी मंडी में सब्जी का थैला लगाने वाला छोटा सा व्यापारी है शब्बीर। अपने बच्चों का शब्बीर ने RTE के अंतर्गत कुचामन की सबसे पुरानी स्कुल नोबल स्कूल में प्रवेश करवाया। अब नियमानुसार फीस माफ होनी चाहिए और फीस माफ हुई भी। लेकिन बच्चों से ₹10000 अलग मांगे गए एक्स्ट्रा क्लास के नाम पर। जबकि शब्बीर के अनुसार बच्चा स्कूल टाइम पर ही जाता है टाइम पर ही आता है अलग से कोई क्लास नहीं दी जाती ना ही अलग से उसे बच्चों को वहां पर रोका जाता है।

दो बार दो अलग-अलग बात पांच पांच हजार की रसीदे भी काटी गई। रसीदे देखीऐ आपकी पूरी स्क्रीन पर। जब अभिभावक ने इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के अधिकारियों से की तो अधिकारियों ने विद्यालय से स्पष्टीकरण मांगा देखिए नोटिस की कॉपी अपनी पूरी स्क्रीन पर। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया की रसीद एलकेजी की काटी गई है। जबकि छात्र का प्रवेश पोर्टल पर कक्षा प्रथम में प्रदर्शित हो रहा है।

तो संबंधित विद्यालय ने अपने लेटर पैड पर स्पष्टीकरण लिख कर दिया कि बच्चा पढ़ने में बहुत कमजोर है इसलिए इससे अतिरिक्त शुल्क लिया गया है। इस बच्चे को अतिरिक्त क्लास दी जाती है । यह भी देखीऐ अपनी पूरी स्क्रीन पर। दोस्तों अभिभावक की सहमति के बगैर अतिरिक्त क्लास का कोई औचित्य नहीं है। और शबीर ने यहां स्पष्ट रूप से कहाँ की उससे इस संबंध में कोई बात नहीं की गई।

फिर भी मान लिया जाए की एक छात्र कमजोर था इसलिए उसे एक्स्ट्रा क्लास दी गई। लेकिन यहां एक नहीं दो नहीं तीन नहीं चार नहीं पूरे 11 विद्यार्थियों के अभिभावकों ने क्विक न्यूज़ से संपर्क किया और इस संबंध में बताया। साथ ही अभिभावकों का कहना है की यहां सिर्फ 11 ही नहीं पता नहीं कितने अभिभावक है जो इस बात से परेशान है। देखिए 11 लोगों की रसीदे अपनी पूरी स्क्रीन पर।

यह सारा गोरख धंधा ट्यूशन फीस के नाम पर ली गई राशि का है। और जो आपने रसीदे देखि है यह सभी अभिभावकों द्वारा क्विक न्यूज़ को उपलब्ध करवाई गई है। आरटीई के नाम पर यह कैसी लूट है। विभागीय अधिकारियों से क्विक न्यूज़ का व्यक्तिगत निवेदन है कि इस तरह की लूट पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए। क्योंकि यह केवल एक स्कूल मामला है जो की क्विक न्यूज़ ने उजागर किया है। और भी कई स्कूलों में कई स्कूलों में इस तरह के मामले चल रहे होंगे। बहरहाल आने वाले एपिसोड में हम बात करेंगे किताबों के बोझ तले दबते बच्चे और कमीशन खाते स्कूल संचालक।
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