दोस्तों घर-घर कचरा संग्रहण योजना आजकल बड़ी सुर्खियों में है। दोस्तों यह योजना राजस्थान की करीब सात या आठ नगर निकाय में लागू की गई है।दोस्तों योजना में क्या है क्या नहीं है उस पर एक अलग एपिसोड बनाया जा सकता है। लेकिन फिलहाल हम बात करेंगे इसके विरोध की दोस्तों कुचामन नगर परिषद द्वारा इसका शुरू से ही पुरजोर विरोध किया गया है।और क्विक न्यूज़ पहले भी इस पर एक कार्यक्रम कर चुका है।
दोस्तों इस योजना का कुचामन में लागू होना कई तरह से सवाल खड़े करता है, दरअसल दोस्तों किसी भी प्रकार के ठेके को पास होने में से पहले इसका प्रस्ताव चुने हुए बोर्ड के सामने रखा जाना चाहिए।यदि बोर्ड की स्वीकृति हो तब ही टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकता है। लेकिन यहां दोस्तों सामान्य सी बात है कि या तो बोर्ड में प्रस्ताव लाया ही नहीं गया आयुक्त महोदय ने अपने मनमानी तरीके से ही इस टेंडर को पास कर दिया और यदि लाया गया तो है तो नगर परिषद बोर्ड इसके विरोध में क्यों खड़ा दिखाई देता है।
दोस्तों पिछली 1 तारीख को इसके विरोध में सभापति, उपसभापति और सभी चुने हुए कांग्रेसी पार्षदों ने एक ज्ञापन राज्य सरकार के नाम दिया था। उसपर क्विक न्यूज़ एक कार्यक्रम पहले भी कर चुका है।
इसी के विरोध में आज वार्ड नंबर 10 के पार्षद मोहम्मद फारूक टाक ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन दिया और उन्होंने मांग की इस यू डी टैक्स को पूर्ण रूप से बंद कराया जाए।और सफाई व्यवस्था को सुचारू रूप से करवाया जाए दोस्तों आप अपनी स्क्रीन पर देख सकते हैं।
लेकिन दोस्तों इस प्रकरण ने परसों नया मोड़ ले लिया जब 1 अगस्त को जहां एक और सभापति, उपसभापति और सभी कांग्रेसी पार्षद इस घर-घर कचरा संग्रहण टैक्स योजना का विरोध जाता रहे थे।आयुक्त पिंटू लाल जाट ने एक वक्तव्य देकर नगर परिषद की चुनी हुई बोर्ड को ही कठघरे मे खड़ा कर दिया। और यहां तक कह दिया कि आरोप लगाने वाले ठेकेदार की मोनोपोली चलाना चाहते हैं।
निविदा प्रक्रिया नियमानुसार ही हुई है दोस्तों यहां आयुक्त महोदय की यह बात संदिग्ध लगती है क्योंकि यदि निविदा प्रक्रिया नियमानुसार होती तो इस पर बोर्ड का विरोध नहीं सहमति होती।अब दोस्तों नगर परिषद बोर्ड ने आयुक्त की इस टिप्पणी पर अपना आक्रोश जताया है।दोस्तों जब क्विक न्यूज़ ने पार्षदों से बात की तो कई पार्षदो ने दबी जबान मे यह कहा की आयुक्त महोदय ना तो जनता के प्रति जवाब देह है,ना ही बोर्ड के प्रति जवाब देह है।आयुक्त महोदय सिर्फ वर्तमान विधायक और मंत्री महोदय श्री विजय सिंह चौधरी के प्रति जवाबदेह हैं।
अब दोस्तों नगर परिषद बोर्ड ने आयुक्त की टिप्पणी पर अपना आक्रोश जताया है। दोस्तों नगर परिषद उप सभापति हेमराज चावला ने प्रेस नोट जारी किया है।जो आपकी स्क्रीन पर है,दोस्तों इनमें से कुछ अंश आपको मैं पढ़ कर सुनना चाहूंगा।
बहरहाल दोस्तों जो भी हो शहर में एक और जहां सफाई कर्मियों की हड़ताल चल रही है पूरा शहर गंदगी से अटा पड़ा है।वहीं नगर परिषद में चुने हुए जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियो के बीच बढ़ता गतिरोध शहर के लिए कितना हानिकारक सिद्ध हो सकता है आप समझ सकते हैं।
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