
माफ़ कीजिएगा यह कार्यक्रम मुझे कल करना चाहिए था लेकिन मैं आज कर पा रहा हूं। दरअसल मे कुछ लोगो के विचार जानना चाहता था इसलिए एक दिन लेट यह कार्यक्रम कर पा रहा हूँ। मतलब एक दिन लेट दोस्तों आज का कार्यक्रम पूरी तरह गांधी पर आधारित है। कल गांधी जयंती थी आज के कार्यक्रम से मैं उन लोगों तक असलियत पहुंचाना चाहता हूं जो बगैर किसी बात का अध्ययन किये सिर्फ व्हाट्सएप ज्ञान पर के आधार पर गांधी जैसी शख्ससियत को छोटा करना चाहते हैं। दोस्तों एक कोई सज्जन है नाम नहीं लूंगा इनका। श्रीमान दिन में लगभग 50 से 60 मैसेज फॉरवर्ड करते हैं। और सबसे बड़ी बात यह है कि उनके द्वारा मैसेज सभी के सभी आईटी सेल के होते हैं और सभी मेसेज फ़ारवर्डेड होते हैं। यह जनाब गांधी को टकला जैसे कई नाम से नवाते हैं और इन जैसे बहुत से लोग सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हुए दिखाई देते हैं।

अब इन सभी महापुरुषों क़ो अवगत करवाना चाहता हूं सबसे पहले तो गांधी जयंती के दिन उनके आदर्श पुरुष प्रधानमंत्री मोदी सबसे पहले बापू को श्रद्धांजलि देने राजघाट पर पहुंचे। कल सुबह यानी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन। यही नहीं जब भी कोई विदेशी राष्ट्राअध्यक्ष भारत आते हैं या प्रधानमंत्री खुद विदेश जाते हैं तो सबसे पहले गांधी जी को ही अपना नमन करते हैं। विश्व में 110 से अधिक देशों में गांधी की प्रतिमाएं और स्मारक मौजूद है। यहां तक जिस देश इंग्लैंड से गांधी जी की दुश्मनी होनी चाहिए थी वहां भी लंदन में स्थित पार्लियामेंट स्क्वायर में गांधी की काँस्य प्रतिमा मौजूद है। और यही बात गांधी की महानता को प्रदर्शित करती है।

चलिए अब बात करते हैं गांधी ने क्या किया? चलिए एक सरल सा सवाल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कोई एक ऐसा नाम बताइए जिसने पूरे भारत की जनता को एक सूत्र में बाँधा हो वह भी जब तब जब संचार साधनों की शून्यता थी। एक गांव से दूसरे गांव में समाचार पहुंचाने में भी कई दिन लग जाते थे। ऐसे में एकमात्र गांधी ही थे जो गुजरात से आवाज लगाते और बिहार के चंपारण में आदमी जंगे आजादी के लिए उठ खड़ा होता। यह था गांधी का जलवा नमक सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन,अंग्रेजों भारत छोड़ो, संपूर्ण महाराज जैसे आंदोलन गांधी की ही दिन थे। और उन्हें पूरे भारत का समर्थन हासिल था क्या गरीब क्या अमीर सब गांधी की एक आवाज पर खड़े हो जाते थे और गांधी के साथ जेल जाने के लिए तैयार थे, गोली खाने के लिए तैयार थे, पुलिस की लाठियां खाने के लिए तैयार थे। सबसे बड़ी बात गांधी सिर्फ असहयोग और अहिंसा के बल पर यह सब करने के लिए उतरे थे।

वही इसके ठीक विपरीत श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए अंग्रेज गवर्नर को चिट्ठी लिखी थी। उनके परम आदर्श सावरकर ने अंग्रेजों को दर्जनों बार माफ़ी नामा लिखा था, मुखर्जी ने जिन्ना की मुस्लिम लीग के साथ तीन राज्यों में सरकार बनाई थी, आरएसएस ने 52 साल तक अपने मुख्यालय में तिरंगा नहीं फहराया था, आरएसएस की शाखा में कभी तिरंगा नहीं फहराया गया, 28 दिसंबर 1949 को आरएसएस ने अपने मुख्यमंत्री ऑर्गेनाइजर के अंक में राष्ट्रगान को अधिकारियों की पार्टी में गया जाने वाला “आइटम आफ एंटरटेनमेंट” लिखा था। सावरकर ने हिंदू युवकों से सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के बजाय अंग्रेजों की सेना में भर्ती होने का आह्वान किया था और यह सारी बातें रिकॉर्ड है दस्तावेज मौजूद है। आप चाहे तो गूगल कर सकते हैं।

और यह लोग जिन्होंने हर कदम पर भारत की आजादी का विरोध किया आज अपने आप को देशभक्त और गांधी को देशद्रोही कहते हैं। अब बात करते हैं नाथु राम गौड़से की जिसे यह सबसे बड़ा देशभक्त कहते हैं। भाई साहब उस जमाने में गोडसे के पास रिवाल्वर थी और इन्हें रिवाल्वर चलाना भी आता था। भारत के सबसे बड़े दुश्मन अंग्रेज थे लेकिन मजाल है बंदे ने कभी किसी अंग्रेज को पत्थर भी मारा हो। छोड़िए पत्थर क़ो कभी किसी अंग्रेज को यह तक नहीं कहा कि तुम अपने देश इंग्लैंड जाओ भारत मेरा देश है इसमें हम रहेंगे।
मर भी तो किसे एक ऐसे है बुड्ढे को जो जीवन भर भारत की सेवा में लग रहा। जंगे आजादी में अपना सब कुछ उसने त्याग दिया जिसके आश्रम में सुबह-शाम राम धुन होती थी। जिसने साहित्य लिखा तो गीता लिखी। मरते वक्त उसके मुंह से हैं राम शब्द निकले। अब बताइए उससे बड़ा हिंदू कौन होगा। जिसे आज पूरा विश्व सम्मान देता है। गाँधी की ज़ब हत्या हुई थी तब जिन्ना ने कहाँ था “एक अच्छा हिन्दू मर गया”। भाई जी आसमान की तरफ मुंह करके थूकोगे तो थूक तुम्हारे ही मुंह पर गिरने वाला है।

एक बार सिर्फ यह बातें आईटी सेल छोड़कर असली इतिहास पर ध्यान दीजिए। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। एक बात और गांधी को राष्ट्रपिता किसने बोला था गांधी जी ने खुद नहीं कहा था कि उन्हें राष्ट्रपिता बोले उन्हें राष्ट्रपिता बोला था सुभाष चंद्र बोस ने। बापू भी उन्होंने खुद को बोलने के लिए नहीं कहा था उन्हें महात्मा बोलने के लिए भी नहीं कहाँ था उन्हें महात्मा नाम दिया था रविंद्र नाथ टैगोर ने। गांधी को महात्मा गांधी ने गांधी ने नहीं बनाया था उन्हें महात्मा बनाया था इस देश की जनता ने। तो फिर समस्या गांधी से क्यों समस्या होनी चाहिए इस देश की जनता से। इस देश की जनता ने उन्हें प्यार दिया था।

19 वीं शताब्दी की शुरुआत तक पूरे विश्व में हिंसा का बोलबाला था और भारत में 1885 में स्थापित हुई कांग्रेस दो भागों में बटी थी एक था नरम दल जो कि कोर्ट में लड़ना पिटीशन देना एप्लीकेशंस लगाना ज्यादा पसंद करता था। दूसरी तरफ था गर्म दल जिसके नेता थे लोकमान्य तिलक। और वह कुछ लोगों को साथ लेकर चल रहे थे। लेकिन 1915 में गांधी का उदय हुआ उस समय भारत की ज्यादा आबादी गांव में थी और ग्रामीण लोग ज्यादा किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव महसूस नहीं करते थे। और इससे अंग्रेजों को ताकत मिलती थी। गांधी ने इस बात को समझा उन्होंने शहरी परिवेश एक बेरिस्टर का परिवेश त्यागा और गांव की वेशभूषा अपनाई एक धोती पहनी और तब ग्रामीण में गांधी से जुड़ाव महसूस किया और उदय हुआ महात्मा गांधी का।
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