
कहानी है साल 1973 में रिलीज हुई एक फिल्म “दो फूल” की विनोद मेहरा,महमूद,अशोक कुमार,अंजना मुमताज, अरुणा ईरानी, जीवन आदि जैसे बड़े कलाकारों से सजी इस फिल्म के निर्माता निर्देशक थे बी आर चोपड़ा और एस रामनाथन। इसी फिल्म से जुड़ा एक किस्सा पेश है आपके सामने। इस फिल्म से एक गाना जो महमूद और अंजना मुमताज पर फिल्माया जाना था। गायक थे किशोर दा और आशा भोंसले।संगीतकार थे आरडी बर्मन यानि पंचम दा।

अब जिस दिन रिकॉर्डिंग होनी थी उस दिन आशा जी तय समय पर स्टूडियो पहुंच गई। लेकिन किशोर दा का कोई अता पता नहीं था। स्टूडियो में पंचम दा, आशा जी और महमूद साहब खुद मौजूद थे। अब जब किशोर दा का इंतज़ार करते हुए काफी वक्त गुज़र गया। लेकिन वो नहीं आए। तभी स्टूडियो का फोन बजा। फोन करने वाले ने कहा कि महमूद से बात करनी है। महमूद साहब जब फोन पर आए तो उन्हें दूसरी तरफ से किशोर दा की आवाज़ आई। किशोर दा महमूद से बोले,”यार महमूद। मैं तो आज आ ही नहीं सकूंगा। मैं किसी रिकॉर्डिंग में फंस गया हूं। फिलहाल तुम ही गाना रिकॉर्ड कर दो। बाद में मैं आकर इसे अपनी आवाज़ में डब कर दूंगा।” दरअसल, वो गाना महमूद पर ही पिक्चराइज़ होना था। इसिलिए महमूद उस गाने को लेकर सीरियस थे। और किशोर दा नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से गाने का पिक्चराइज़ेशन रुक जाए।

महमूद परेशान हो गए। उन्होंने अपनी परेशानी पंचम दा को बताई। आशा भोसले जी को भी पता चला कि किशोर कुमार जी ने क्या सुझाव दिया है। पंचम दा और आशा जी को इसमें कुछ गलत नहीं लगा। बल्कि उन्हें किशोर दा का आईडिया पसंद आया था। मगर महमूद गाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। उन्हें लग रहा था कि आशा भोसले जैसी इतनी बड़ी सिंगर के सामने उनके हलक से आवाज़ ही नहीं निकल सकेगी। पंचम दा और आशा जी ने महमूद समझाया कि कैसे भी करके फिलहाल गाना रिकॉर्ड कर दो ताकि शूटिंग कंप्लीट हो जाए। बाद में तो किशोर दा डब कर ही देंगे। आखिरकार महमदू साहब ने हिम्मत जुटाई और जितना बेस्ट वो अपनी तरफ से कर सकते थे, वो करते हुए गाना रिकॉर्ड कर दिया।

रिकॉर्डिंग पूरी होने के बाद जब पंचम दा ने गीत को सुना तो उन्हें बड़ा मज़ा आया। उन्होंने महमूद जी का गाया वो गीत स्टूडियो के और भी कई लोगों को सुनाया। जिसने भी गाना सुना उसने यही कहा कि महमूद साहब ने तो बड़ा अच्छा गाना रिकॉर्ड किया है। कुछ दिन बाद इस गाने के बारे में जब राजेश खन्ना साहब को पता चला तो वो भी इसे सुनने स्टूडियो आ गए। गाना सुनकर उन्होंने महमूद साहब को फोन किया और कहा,”गाना तो तुमने बड़ा अच्छा गाया है। ये गाना हिट होने वाला है।” महमूद हैरानी से बोले,”मैंने तो बड़ा बेसुरा गाया था भाई। कैसे हिट होगा ये गाना?” राजेश खन्ना बोले,”तुम्हारा बेसुरापन ही इस गाने को यूनीक बना रहा है। गारंटी है कि ये गाना हिट होगा।”

आखिरकार एक दिन किशोर दा ने भी वो गाना सुना। और किशोर दा को भी गाना सुनकर बड़ा मज़ा आया। किशोर दा ने भी यही कहा कि ये गाना तो महमूद की आवाज़ में ही जाना चाहिए। इसको मेरे या किसी और से रिकॉर्ड़ कराने की कोई ज़रूरत ही नहीं है। इस तरह वो गाना महमूद साहब की आवाज़ में ही फिल्म में रखा गया। गाने में महमूद साहब के साथ अंजना मुमताज़ दिखाई देती हैं। वो फिल्म(दो फूल) जब रिलीज़ हुई तो लोगों पर बहुत प्रभाव ना छोड़ सकी। लेकिन आशा जी व महमूद साहब का गाया वो गीत लोगों को बहुत पसंद आया। आज भी वो गाना लोग सुनना पसंद करते हैं।
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