
सवाई माधोपुर ,गणेश जी का लख्खी मेला, गणेश जी की परिक्रमा , जहां प्रकृति के अद्भुत नजारों के साथ वन्य जीवों का रोमांच हर पल खतरे के साथ ही लोम हर्षक नजारे । दोस्तों हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी हम पहुंचे सवाई माधोपुर जंगल की सैर करने लेकिन यदि यह कहा जाए कि इस वर्ष की यात्रा पिछले कई वर्षों से ज्यादा रोमांचक रही तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी । वैसे तो दोस्तों मैं पिछले 15 वर्षों से लगातार इस यात्रा पर जा रहा हूं । लेकिन इस वर्ष भयंकर बारिश से पूरा सवाई माधोपुर अस्त व्यस्त था। लेकिन फिर भी हम लोग अपनी टीम के साथ दिनांक 23 अगस्त 2025 को रवाना हो गए ।

हमारी 17 लोगों की टीम सुबह रणथंबोर एक्सप्रेस से रवाना हो गई जिनमें में मेरी धर्मपत्नी जो क्विक न्यूज़ की सह संपादक भी है वंदना भारद्वाज । मित्र नवीन जी, उनकी धर्म पत्नी बीना भाभी के साथ, नेहपाल जी अपनी पत्नी सुमन भाभी के साथ , अशोक जी भाभी जी के साथ , अभिन्न मित्र देसी गुर्जर, पवन जांगिड़, पप्पू ,बाबूलाल ,सीताराम , मेरी बेटी फ्रीलांस पत्रकार प्रतिष्ठा, जयपुर के फ्रीलांस पत्रकार निखिल, हमारी प्यारी लाडली छोटू मतलब संस्कृती भारद्वाज ,और हमारे ही ग्रुप के सबसे ज्यादा उम्रदराज रामकरण की गुर्जर साहब ।

वैसे दोस्तों हम सभी साथियों के अलावा सवाई माधोपुर के भी कुछ हमारे मित्र भी थे जिनके कारण यह सफर यादगार बन गया । मुख्यतः रामलाल जी बैरागी जो कि हमेशा अपनी गाड़ी के साथ हमारे एक फोन पर हमारे हमारी मदद को तैयार रहते हैं । पत्रकार केपी सिंह साहब जो की एक फोन पर ही हमारा सारा काम करवा देते हैं । एक फर्जी शराबी रेंजर जिसने हमें जंगल में परेशान किया अपनी दादा गिरी से। लेकिन हमारे ग्रुप ने भी उसे अच्छा सबक सिखाया । आगे से शायद वह यात्रियों को परेशान नहीं करेंगे ।


और सबसे अधिक याद रहने वाला युवक मयंक गौतम जिसने पहाड़ों में हमारी सहायता की उस समय जब मेरी धर्मपत्नी वंदना भारद्वाज की तबीयत खराब हो गई थी । बहरहाल हमें जहां 12:30 बजे सवाई माधोपुर पहुंचना था बारिश के कारण हमारी ट्रेन सवाई माधोपुर से पहले स्टेशन देवपुरा में ही लगभग 5:30 घंटे लेट हो गई । कारण माधोपुर के पहले पटरी के नीचे से रेत निकल गई थी और उसकी मरम्मत चल रही थी ।

अंत में हमें रामलाल जी बैरागी की मदद लेनी पड़ी उनकी गाड़ी मंगवाकर बैरागी की तुरंत फोन करते ही अपनी और एक अन्य गाड़ी लेकर देवपुरा पहुंच गए । और हम उनकी गाड़ी से सवाई माधोपुर पहुंचे वही हमें पत्रकार केपी सिंह जो की लगातार हमसे संपर्क बनाए हुए थे हमारा इंतजार करते हुए मिले । अब दोस्तों शुरू हुई हमारी जंगल यात्रा दोस्तों हर वर्ष हमारा रूट रहता है अमरेश्वर महादेव , जंगल मार्ग से गणेश मंदिर, जंगल में शोलेश्वर महादेव और अंत में सीता माता मंदिर में तीसरी रात में सीता माता के मंदिर की रात्रि और उसके बाद चौथ का बरवाड़ा शिवाड़ और अंत में कुचामन ।

लेकिन इस बार हमें अमरेश्वर महादेव मंदिर बारिश की अधिकता के कारण बंद मिला तो हमने यात्रा का रूट बदल दिया । जहांसे हम बाहर निकलते हैं वहां से हमने एंट्री ली । मतलब पहले हमने सीता माता के मंदिर में जाने का निश्चय किया दोस्तों यात्रा का विवरण अगले भाग में आपके सामने प्रस्तुत होगा आज हमने यात्रा का जो रूपरेखा थी वह आपको बतादी है तो धन्यवाद दोस्तों इंतजार कीजिए कल के अगले भाग का……..
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