
दोस्तों यह है पंचायत समिति कुचामन सिटी द्वारा पंचायत समिति परिसर में निर्मित दुकाने,जो कि लगभग 35 वर्ष पूर्व निर्मित की गई है। इन दुकानों का निर्माण पंचायत समिति द्वारा आय में वृद्धि को देखते हुए किया गया था। इन्हीं दुकानों से जुड़ा एक मामला तब सामने आया जब आरटीआई एक्टिविस्ट चतुर्भुज शर्मा ने एक नई दुकान के निर्माण पर सवाल खड़ा किया। दोस्तों हुआ कुछ ऐसा कि इन्हीं दुकानों में से एक पतली गली लगभग 5 फीट की होगी जो की छोड़ी गई थी। पीछे स्थित कार्यालय में जाने के लिए ताकि वृद्ध और अशक्त नागरिकों को जाने में सुविधा हो। अटल सेवा केंद्र पहुंचने के लिए लंबा चक्कर नहीं काटना पड़े।

क्विक न्यूज़ इस विषय पर पहले भी काफी बार कार्यक्रम कर चुका है। इस 5 फीट की गली पर पंचायत समिति में ही कार्यरत एक कर्मचारी ओम प्रकाश कुमावत की नजर पड़ गई। इन महानुभाव ने वहां एक दुकान का निर्माण कर लिया और उसे किराए पर भी चढ़ा दिया। यही नहीं 5 वर्ष तक इस दुकान का किराया भी निजी काम में ले लिया। जैसा कि आप अपनी स्क्रीन पर देख सकते हैं। दुकान चालू है दुकान के अंदर सामान भी पड़ा है और बाहर दुकानदार चाय भी बना रहा है चाय दे भी रहा है।

अभी भी यहां पर दुकान मौजूद है हालांकि दुकान को खाली करवा लिया गया है।यहां विशेष बात यह है कि पंचायत समिति के रिकॉर्ड में इस दुकान का कोई जिक्र ही नहीं है। जब चतुर्भुज शर्मा को इस दुकान का पता चला तो उन्होंने इसकी शिकायत की और जैसे ही शिकायत हुई इस दुकान में चाय की दुकान चलाने वाले दुकानदार बालू राम कुमावत से दुकान खाली करवा ली गई। तब से लेकर अब तक आरटीआई एक्टिविस्ट चतुर्भुज शर्मा इस लड़ाई के को अकेले दम पर लड़ रहे हैं।

सभी अधिकारियों को शिकायत करने के बावजूद उक्त मामले में किसी तरह का संज्ञान नहीं लिया गया है। जानते हैं खुद चतुर्भुज शर्मा से इस बारे में विडिओ द्वारा। वही पिछले दिनों इसी पंचायत समिति से जुड़ा एक और मामला प्रकाश में आया 1 सितंबर को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार विकास अधिकारी श्री राहुल पारीक ने अपने पैतृक निवास ग्राम घाटवा में सड़क पर लगने वाले सीमेंट ब्लॉक्स अपने निजी आवास पर लगवा दिए यह सब करीब 1,70,000 का घोटाला है। राजस्थान पत्रिका ने इस भ्रष्टाचार को अपने मुख्य पृष्ठ पर प्रमुखता से प्रकाशित किया है। आप अपनी स्क्रीन पर समाचार देख सकते हैं।
राजस्थान पत्रिका से साभार

आगे जांच की गई जिसमें जांच कमेटी ने इसमें अनियमित भी मानी लेकिन उक्त अधिकारी पर कोई कार्यवाही होना मुनासिब नहीं समझा गया। बहरहाल इन सब बातों पर जानकारी लेने जब क्विक न्यूज़ पंचायत समिति पहुंचा तो विकास अधिकारी ने इस संबंध में बात करने से स्पष्ट मना कर दिया। वहीं बैठे एक कर्मचारी ने हमसे हमारे रजिस्ट्रेशन आदि के बारे में भी जानकारी चाहि, पूछताछ की और हमें कहां की सर से बात करने के लिए पहले प्रार्थना पत्र देना पड़ता है फिर सर टाइम देंगे। देखिए वीडियो में।

आज ज़ब चतुरभुज शर्मा ने एडीएम साहब से इस संबंध में शिकायत की तो उन्होंने उल्टा चतुर्भुज शर्मा को ही इस मामले में दोषी करार दे दिया। देखिए संलग्न वीडियो में। तो दोस्तों यह घोटाला कहां तक जाएगा कहां नहीं जा सकता। चतुर्भुज शर्मा लगभग डेढ़ साल से इस संबंध में लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन अभी तक यह मामला अंजाम तक नहीं पहुंचा है। चतुर्भुज शर्मा के अनुसार जहां तक हो सका वह इस मामले को लेकर जाएंगे हो सकता है आगे इस मामले को न्यायालय में भी ले जाया जाए।

बात यही नहीं रुकती दोस्तों पंचायत समिति में कार्यरत कर्मचारी ओम प्रकाश शर्मा द्वारा चतुर्भुज शर्मा को मानहानि के मुकदमे का नोटिस भी भेजा गया है जो कि आपकी स्क्रीन पर देखा जा सकता है। अब दोस्तों आप दर्शक इस बात पर निर्णय करें कि यह भ्रष्टाचार है या शिष्टाचार।
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