“न्याय हमारा अधिकार है, कुचामन से अन्याय बर्दाश्त नहीं।” “सत्ता प्रजा के लिए होती है, प्रजा सत्ता के लिए नहीं।”

कुचामन को जिला बनाओ की मांग धीरे-धीरे जोर पकड़ती जा रही है। आज इसी क्रम में कुचामन अभिभाषक संघ और कुचामन के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर एक बड़ी वाहन रैली निकाली। सुबह लगभग 11:30 बजे सभी वकील स्थानीय न्यायालय से अपने-अपने वाहनों पर नारे लगाते हुए निकले। नए बस स्टैंड से रवाना होकर पुराने बस स्टैंड से गुजरते हुए सभी अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता अहिंसा सर्किल पहुंचे यहां से सभी ने अपने-अपने वाहन छोड़कर पैदल ही रवाना हुए।
यहां से पैदल चलकर सभी वकील एसडीएम कार्यालय तक पहुंचे यहां फिर कहानी में एक नया ट्वीस्ट आ गया।कारण सभी अधिकारी जिन्हें ज्ञापन से अपना था एक मीटिंग में चले गए थे। इस पर वकील और कार्यकर्ता इस बात पर अड़ गए की ज्ञापन उपखंड अधिकारी से नीचे किसी भी कर्मचारी को नहीं सोपा जाएगा।और उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर नारेबाजी करने लगे लिए देखिए वीडियो में किस तरह से नारे बाजी की गई।
लगभग डेढ़ घंटे के लंबे इंतजार के बाद उपखंड अधिकारी पहुंचे और ज्ञापन दिया गया।अब बात करते हैं अधिवक्ता संघ की प्रमुख मांगों की तो इनकी प्रमुख मांगे तीन ही है।
- कुचामन को डीडवाना कुचामन जिले का जिला मुख्यालय घोषित किया जाए।
2.कुचामन में जिला न्यायालय की स्थापना की जाए।
3.ए डी एम कुचामन सिटी के क्षेत्राधिकार को पुन: स्थापित किया जाए।

दोस्तों आगे सुनते हैं वह ज्ञापन जो आज अधिवक्ता संघ और कुचामन के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सोपा।
विषयः डीडवाना-कुचामन जिले के प्रशासनिक मुख्यालय के रूप में कुचामन की विधिसम्मत घोषणा, कुचामन में जिला न्यायालय की स्थापना, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) कुचामन सिटी के क्षेत्राधिकार की बहाली एवं संबंधित पत्रावलियों की पुनः स्थापना, जनभावना की अवहेलना के विरुद्ध सरकार को संभावित जनाक्रोश, आंदोलन एवं चुनावी दुष्परिणाम की चेतावनी।

माननीय महोदय,उच्चतम लोकतांत्रिक मूल्यों एवं विधिक सिद्धांतों का पालन करते हुए, हम यह औपचारिक ज्ञापन प्रस्तुत कर राजस्थान सरकार को इस अन्यायपूर्ण एवं अदूरदर्शी प्रशासनिक निर्णय की समीक्षा करने एवं कुचामन सिटी को उसके न्यायोचित अधिकार प्रदान करने हेतु अविलंब हस्तक्षेप की माँग करते हैं।राजस्थान सरकार द्वारा डीडवाना-कुचामन जिले की स्थापना के समय यह सर्वविदित एवं सर्वमान्य तथ्य था कि कुचामन सिटी को जिला मुख्यालय एवं जिला न्यायालय का दर्जा प्राप्त होगा, ० क्योंकि यह नगर भौगोलिक, प्रशासनिक, न्यायिक, सामाजिक एवं ऐतिहासिक रूप से सभी आवश्यक योग्यताओं से परिपूर्ण है किंन्तु, जनभावनाओं की पूर्णतः अवहेलना एवं प्रशासनिक तानाशाही के चलते डीडवाना को जिला मुख्यालय घोषित करने का मनमाना निर्णय लिया गया, जो न केवल न्यायिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण है, बल्कि लाखों नागरिकों के अधिकारों का खुला हनन भी है।इस परिप्रेक्ष्य में, यह ज्ञापन सरकार की अदूरदर्शिता, प्रशासन की स्वेच्छाचारिता, जनाक्रोश, कुचामन को जिला मुख्यालय एवं जिला न्यायालय बनाए जाने के लाभों, डीडवाना की अयोग्यता, सरकार को संभावित चुनावी नुकसान एवं जनांदोलन की चेतावनी को श्रीमान के संज्ञान में लाने हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है।

श्रीमान को यह भी अवगत कराया जाता है कि कुचामन अभिभाषक संघ दिनांक 21 फरवरी 2025 से न्यायिक प्रक्रिया के निष्पक्ष संचालन, प्रशासनिक अन्याय के विरुद्ध संघर्ष तथा कुचामन को जिला मुख्यालय एवं जिला न्यायालय घोषित कराने की माँग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। यह हड़ताल केवल कुचामन के अधिवक्ताओं तक सीमित नहीं, बल्कि नावा, परबतसर एवं मकराना अभिभाषक संघों सहित संपूर्ण न्यायिक एवं सामाजिक तंत्र से व्यापक समर्थन प्राप्त है। सरकार की न्यायिक संवेदनहीनता एवं प्रशासनिक तानाशाही के विरुद्ध यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक जनभावना के अनुरूप न्यायिक एवं प्रशासनिक निर्णय नहीं लिए जाते। यदि सरकार ने इस आंदोलन को अनदेखा किया, तो न्यायिक व्यवस्था ठप होने के दुष्परिणामों की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन एवं सरकार की होगी।
कुचामन को जिला मुख्यालय क्यों घोषित किया जाए तथा क्यों कुचामन में जिला न्यायालय का सृजन आवशयक है ?
- भूमि की पर्याप्तता बनाम डीडवाना की सीमितता :
कुचामन में 1000+ बीघा से अधिक राजकीय भूमि उपलब्ध है, जबकि डीडवाना में जिला मुख्यालय एवं न्यायालय के लिए उपयुक्त भूमि का पूर्णतः अभाव है। 35 बीघा भूमि पूर्व से न्यायालय हेतु आवंटित है, जिससे न्यायिक भवन निर्माण पर करोड़ों रुपये की बचत होगी। डीडवाना में भूमि अधिग्रहण की बाध्यता के कारण प्रशासनिक भवनों की स्थापना कठिन एवं खर्चीली होगी। क्या सरकार इस तथ्यों से अनभिज्ञ है, या फिर राजनैतिक लाभ हेतु जनता को जानबूझकर धोखे में रखा जा रहा है?
- भौगोलिक दृष्टि से कुचामन क्यों सर्वोत्तम विकल्प?
कुचामन, नावा, मकराना, परबतसर एवं कुचामन तहसील का भौगोलिक केंद्र है। सभी तहसीलों से कुचामन तक सीधी सड़क एवं रेलवे कनेक्टिविटी उपलब्ध है। जयपुर, नागौर, अजमेर, सीकर एवं जोधपुर तक सीधी बस एवं रेल सेवा सुलभ है। व्यापारिक, औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से कुचामन अत्यंत विकसित है। क्या सरकार चाहती है कि लाखों नागरिक अपने प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यों के लिए असुविधाजनक मार्गों से डीडवाना तक अनावश्यक दूरी तय करें?
- न्यायिक दृष्टि से कुचामन ही उपयुक्त क्यों?
300+ अधिवक्ता कुचामन न्यायालय में सेवारत हैं, जो जिला न्यायालय संचालन के लिए पर्याप्त हैं। पूर्व से न्यायालय हेतु भूमि एवं अधिवक्ताओं की उपलब्धता कुचामन को आदर्श न्यायिक केंद्र बनाती है। नावा, मकराना, परबतसर के नागरिकों को कुचामन में जिला न्यायालय होने से त्वरित न्याय प्राप्त होगा। डीडवाना में न न्यायिक संसाधन, न प्रशासनिक आधारभूत सुविधाएँ, फिर वहाँ जिला न्यायालय की स्थापना का औचित्य क्या है?
- ऐतिहासिक एवं प्रशासनिक दृष्टि से कुचामन की श्रेष्ठता
कुचामन का ऐतिहासिक किला प्रतिहारों, मुगलों, राजपूतों एवं अंग्रेजों के शासनकाल में न्यायिक एवं प्रशासनिक निर्णयों का केंद्र रहा है। ब्रिटिश गजेटियर एवं राजस्थानी इतिहास में कुचामन को एक स्वायत्त, न्यायोचित एवं प्रभावी प्रशासनिक इकाई के रूप में दर्ज किया गया है। क्या सरकार ऐतिहासिक तथ्यों को दरकिनार कर, केवल राजनैतिक लाभ के लिए कुचामन की उपेक्षा कर रही है?
- सरकार को होने वाले लाभ
- सरकारी बजट की बचतः कुचामन में पूर्व से भूमि उपलब्ध होने के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का व्यय नहीं करना पड़ेगा।
समस्त जिले की जनता को त्वरित प्रशासनिक एवं न्यायिक सेवाएँ उपलब्ध होंगी।
कुचामन के औद्योगिक, व्यापारिक एवं शैक्षणिक विकास से समस्त जिले की प्रगति होगी।
जनता सरकार के इस निर्णय को ऐतिहासिक उपलब्धि मानकर उसका समर्थन करेगी।
डीडवाना में जिला मुख्यालय स्थापित करने से सरकारी धन का दुरुपयोग होगा, जिससे जनाक्रोश जन्म लेगा।
- जन सहयोग एवं समर्थन
इस महत्त्वपूर्ण आंदोलन को नावा, परबतसर, मकराना के अभिभाषक संघों जहाँ करीब 500 से अधिक अधिवक्ता सेवारत हैं सहित नावा, परबतसर, मकराना एवं कुचामन सिटी की समस्त सामाजिक संस्थाओं, व्यापारी संगठनों, किसान संगठनों, युवा संगठनों एवं आम जन का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
यह आंदोलन किसी एक शहर या वर्ग विशेष का नहीं, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र की जनता का न्यायोचित अधिकार सुनिश्चित करने की लड़ाई है। समस्त संगठनों एवं नागरिकों की एकजुटता यह सिद्ध करती है कि जनता अपने अधिकारों के लिए संघर्ष हेतु संकल्पबद्ध है और यदि सरकार ने
उनकी भावनाओं की अवहेलना की, तो उसे गंभीर जनाक्रोश एवं व्यापक विरोध का सामना करना पड़ेगा।
कुचामन, नावा, परबतसर एवं मकराना की जनता इस आंदोलन को मात्र एक प्रशासनिक माँग न मानकर, अपने संवैधानिक अधिकारों एवं सामाजिक न्याय के लिए संगठित संघर्ष के रूप में देख रही है। यह संघर्ष उन नागरिकों की आवाज़ है, जो वर्षों से न्यायिक एवं प्रशासनिक सुविधाओं की माँग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की अदूरदर्शिता एवं प्रशासनिक पक्षपात के कारण उन्हें केवल उपेक्षा ही प्राप्त हुई। यह केवल एक शहर का संघर्ष नहीं, बल्कि संपूर्ण क्षेत्र की न्यायिक एवं प्रशासनिक स्वायत्तता का प्रश्न है। यह आंदोलन एक ऐतिहासिक चेतावनी है कि यदि सरकार अपनी मनमानी, जनविरोधी नीतियों एवं स्वेच्छाचारिता पर अंकुश नहीं लगाती, तो जनता अपने अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को बाध्य होगी। सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट होती है, तो सबसे सुदृढ़ सत्ता भी उसके आगे नतमस्तक हो जाती है। जनता का यह अभूतपूर्व संगठित समर्थन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यदि सरकार ने उनकी भावनाओं की अवहेलना की, तो इसे गंभीर जनाक्रोश एवं तीव्र विरोध का सामना करना पड़ेगा, जिसकी समस्त नैतिक, विधिक एवं राजनीतिक जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी। सरकार यदि इस जनांदोलन को अनदेखा करती है, तो समस्त क्षेत्र में व्यापक धरना-प्रदर्शन उग्र विरोध प्रदर्शन अपरिहार्य होगा। यह आंदोलन केवल वर्तमान सरकार के लिए एक चेतावनी मात्र नहीं, बल्कि भविष्य में प्रत्येक शासन को यह संदेश देने के लिए भी है कि जनभावनाओं की उपेक्षा कर कोई सत्ता स्थायी नहीं रह सकती।
- जनभावना एवं सरकार के लिए चेतावनी
“सत्ता की शक्ति, जनबल से चलती है, जो जनहित भूले, उसका सिंहासन डगमगाता है।”
यदि सरकार हमारी माँगों को अनसुना करती है, तोः
राष्ट्रीय राजमार्गो पर चक्का जाम किया जाएगा।
पूर्ण न्यायिक कार्य बहिष्कार किया जाएगा।
जन आंदोलन को तेज़ कर विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों में सरकार को करारा जवाब दिया जाएगा।
सरकार को चेतावनीः सत्ता सदा नहीं रहती, जनता को धोखा देने वाली सरकारों का हश्र हमेशा बुरा हुआ है।
- हमारी माँगें और सरकार के लिए अंतिम चेतावनी
1) कुचामन को डीडवाना-कुचामन जिले का जिला मुख्यालय घोषित किया जाए।
II) कुचामन में जिला न्यायालय की स्थापना की जाए।
iii) ADM कुचामन सिटी के क्षेत्राधिकार को पुनः स्थापित किया जाए।
“यदि सरकार ने हमारी माँगों को अनसुना किया, तो राजस्थान के इतिहास में सबसे बड़ा जनांदोलन होगा।”
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