Friday , 13 February 2026

एक अकेला सब पर भारी : किशोर दा

  तो दोस्तों एक बार फिर से सिनेमा सिनेमा। और इस कार्यक्रम में आज देखते हैं किशोर दा को। किशोर दा एक ऐसे गायक जिन्हें हम हरफनमौला कलाकार, आवाज़ का जादूगर, गॉड गिफ्टेड सिंगर जैसे कई नामो से नवाजते है। तो आज बात करते हैं किशोर दा और दूसरे गायको की। दोस्तों वैसे तो उसे दौर के सभी गायक एक से बढ़कर एक थे। लेकिन यदि किसी गाने में दो वर्जन आए हो एक किशोर दा का और दूसरा वर्जन किसी अन्य कलाकार का तो श्रोताओं पर हमेशा किशोर दा की आवाज ही असरदार होती थी।

               तो आज पेश है कुछ ऐसे गाने जिनके दो वर्जन होते थे एक वर्जन किशोर दा की आवाज में और दूसरा वर्जन किसी अन्य गायक की आवाज में। तो सुनिए पहला गाना फिल्म प्यार का मौसम, 1969 में आई इस फिल्म के गाने “तुम बिन जाऊं कहां” किशोर कुमार और मोहम्मद रफी साहब दोनों की आवाज में अलग-अलग फिल्मया गया था। और दोनों की आवाज में हमेशा की तरह इस बार भी किशोर दा की आवाज ही भारी पड़ी। बाद में एक फ़िल्म में इसी गाने को हरिहरण की आवाज में भी फिल्माया गया लेकिन जो जादू किशोर दा ने छोड़ा वो कही नहीं मिला। आज भी कोई रोमांटिक मूड में होता है तो किशोर दा की आवाज को ही सुनता है।

               बात करते हैं दूसरे गाने की फिल्म नौकर का गाना “अंखियों में छोटे-छोटे सपने सजाय के” गाना लता दी की आवाज में भी सुनीये है और किशोर दा की आवाज में भी सुनिए। दोनों की आवाज है यहां भी किशोर दा कि खनकती आवाज ही भारी दिखाई देती है।

             बात करते हैं सन 1962 में रिलीज हुई फिल्म रंगोली की किशोर कुमार वैजयंती माला बाली अभिनीत इस फिल्म में एक गाना था आया था “छोटी सी यह दुनिया अनजाने रास्ते हैं”  इस गाने के भी दो वर्जन थे एक लता जी की आवाज में और दूसरा किशोर दा की आवाज में सुनिए दोनों की आवाज में गाना और फैसला आप खुद कीजिए।

             इसके बाद एक और गाना फिल्म थी कलाकार  बोल थे “नीले नीले अंबर पर चांद जब आए” इसका एक वर्जन था साधना सरगम की आवाज में और दूसरा वर्जन था किशोर दा की आवाज में। और किशोर दा ने ऐसा गाया कि आज भी लोग सुनकर झूम जाते हैं।

           अगला गाना उसे दोर का है जब अमिताभ बच्चन फिल्मी आकाश पर छा गए थे। फिल्म थी मुकद्दर का सिकंदर था और गाना था “ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना” दो वर्जन एक वर्जन आशा भोसले की आवाज में दूसरा वर्जन किशोर दा की आवाज में। आज भी यदि कोई इस गीत को गाता है स्टेज पर परफॉर्मेंस देता है तो किशोर दा वाले वर्जन का ही इस्तेमाल करता है। 

            फिल्म अंदाज गीत “जिंदगी एक सफर है सुहाना” वही दो वर्जन एक किशोर दा की आवाज और दूसरी आशा भोसले जी की आवाज इस गीत में किशोर दा की उडलाई आज भी अमर है। मस्ती भरा यह गीत आज भी जब कोई नया जोड़ा मोटरसाइकिल पर चलता है तो यह गाना बरबस ही उसकी आवाज बन जाता है। 

            इसी तरह शर्मीली में भी एक गीत है “खिलते हैं गुल यहां खिलके बिछड़ने को” दो वर्जन में एक लता जी की आवाज दूसरी किशोर दा की आवाज। सुनिए और फैसला कीजिए। एक फ़िल्म थी हम सब उस्ताद हैं गीत था “अजनबी तुम जाने पहचाने से लगते हो” एक वर्जन किशोर दा एक वर्जन लता दी और सब ने सुन तो सिर्फ किशोर दा को।

            एक बहुत ही मशहूर ठुमरी फिल्म कुदरत से बोल थे “हमें तुमसे प्यार कितना” फीमेल वर्जन के लिए थी परवीन सुल्ताना जैसी मशहूर शास्त्रीय गायिका। लेकिन जब किशोर दा की खनकती आवाज में इस गीत का वर्जन लोगों ने सुना तो बस किशोर दा ही किशोर दा।

             और फिर  हरे रामा हरे कृष्णा फिल्म का गीत “फूलों का तारों का सबका कहना है” एक वर्जन की आवाज  लता दी की और दूसरा वर्जन था किशोर दा की आवाज में। सुनिए और कमेंट सेक्शन में आप खुद बताइए। 

            और अब बात करते हैं उसे अमर गीत की जो की राग शिवरंजनी पर आधारित था। लता जी ने भी गया था और किशोर दा ने भी गाया था। फिल्म थी महबूबा गीत के बोल थे , “मेरे नैना सावन भादो” जिसे किशोर दा की आवाज ने अमर कर दिया। कुल मिलाकर मतलब यह है कि किशोर दा की आवाज का एक अलग ही लेवल था। श्रोता सुनते तो सुनते ही रह जाते। 

                        वाह किशोर दा वाह।   

About Manoj Bhardwaj

Manoj Bhardwaj
मनोज भारद्धाज एक स्वतंत्र पत्रकार है ,जो समाचार, राजनीति, और विचार-शील लेखन के क्षेत्र में काम कर रहे है । इनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना है और उन्हें उत्कृष्टता, सत्य, और न्याय के साथ जोड़ना है। इनकी विशेषज्ञता समाचार और राजनीति के क्षेत्र में है |

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