Thursday , 15 January 2026

सार्वजनिक सम्पत्तियों की बिगडती स्थिति : जिम्मेदार कौन

कल कुचामन शहर  में स्थित कुचामन पुस्तकालय ने अपना स्थापना शताब्दी दिवस समारोह धूमधाम से मनाया। और यह कुचामन सिटी के लिए बहुत ही गर्व की बात है। गर्व इस बात का है कि हमारे शहर कुचामन के पुस्तकालय ने अपने छोटे से रूप से प्रारंभ होकर आज इतना भव्य रूप ले लिया है। समय की हर मांग पर हमारा पुस्तकालय खरा उतर रहा है। लेकिन इसके साथ ही कुचामन की अन्य सार्वजनिक संपत्तियों पर भी नजर डाली जाए तो कहानी कुछ और ही नजर आती है। मसलन कुचामन का एकमात्र सार्वजनिक  पार्क पुराने बस स्टैंड पर स्थित कनोइ पार्क भी अपना शतक पूरा करने वाला है।

            नगर परिषद द्वारा संचालित इस पार्क की दशा इतनी खराब हो चुकी है कि यहां यह पार्क सिर्फ विशेष उत्सव मनाने के उपयोग का ही रह गया है। कहने को यह पार्क ठेके पर चल रहा है लेकिन पार्क के ठेकेदार को शायद इस पार्क की सुध लेने का टाइम ही नहीं है। शाम होते ही यहां पर नशेड़ियों का शराबियों का जमावड़ा लगने लगता है। और उनकी उपस्थिति में घूमने वाले तो क्यों कर आएंगे।

            पार्क की घास घास कम कागज प्लास्टिक आदि कचरा ज्यादा नज़र आता है। कुछ वर्षो पहले यहां बच्चों के मनोरंजन के लिए टॉय ट्रेन चलाई गई थी। साथ ही आकर्षित झूले लगाए गए थे। लेकिन देखीये प्रस्तुत वीडियो में किस कदर यहां के झूले अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे हैं और टॉय ट्रेन सिर्फ शो पीस बन कर रह गई है। सुबह-सुबह यदि कोई यहां मॉर्निंग वॉक करने आए तो उन्हें यहां इधर-उधर शराब की खाली बोतले पड़ी मिलती है। 

            कमोबेश ऐसी ही स्थिति कुचामन के एक और सार्वजनिक पार्क नेहरू पार्क की भी है। जवाहर स्कूल के सामने स्थित इस छोटे से पार्क में प्रवेश द्वार के ठीक सामने एक जहाज में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रतिमा लगी हुई है। नाव में चारों तरफ फव्वारे भी लगे हैं लेकिन हमने कभी भी इन फव्वारो में पानी आते नहीं देखा।  साथ ही दोनों तरफ की घास भी सूखी पड़ी हुई है। गौरतलब है की इसी पार्क मै बनी इमारत मै पहले अदालत लगा करती थी और उसके बाद यहां से नगर पालिका भी संचालित हुआ करती थी। 

              भला हो ईश्वर का जो समय-समय पर बरसात करवा कर इन दोनों पार्कों के पेड़ पौधों को पर्याप्त पानी पिला देता है। वरना तो यहां लगे पेड़ पौधे भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहे होते। साथ ही पार्क में प्लास्टिक कागज आदि का कचरा बहुतायत में मिल ही जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि नगर परिषद प्रशासन शहर की इन दोनों बेशकीमती संपत्तियों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। 

             अब दोस्तों यहां एक और संस्थान है जो कि यहां के नागरिकों द्वारा संचालित है। उसकी बात नहीं की जाए तो अन्याय होगा बात है संगीत सदन की भारतीय संगीत सदन एक ऐसा समर्पित संस्थान है जो अपनी पूरी ईमानदारी से संगीत के क्षेत्र में यहां की प्रतिभाओं को तराशने के काम में लगा है। और वह सिर्फ दानदाताओं के सहयोग पर ही हो रहा है। लेकिन इस संस्थान के साथ भी पिछले कुछ वर्षों पहले भयंकर अन्याय होते-होते बचा। भला हो स्वर्गीय नटवरलाल जी वक्ता और पत्रकार विमल कुमार पारीक का जिन्होंने अपने निजी प्रयासों से इस संस्थान को बचा लिया वरना यह भी अभी तक सरकारी महत्वाकांक्षाओं की भेंट कर चुका होता।

               दोस्तों हुआ कुछ ऐसा की कोरोना काल में जब लॉकडाउन था तब नगर परिषद कुचामन सिटी ने क्वॉरेंटाइन सेंटर के नाम पर इस संस्थान की बिल्डिंग को अपने कब्जे में ले लिया। और जब इसे वापस संगीत सदन को सौंपने की बात आई तो यह कहा गया कि यह संपत्ति नगर परिषद की है। भला हो स्वर्गीय नटवर जी वक्ता और पत्रकार विमल पारीक का जिन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का प्रश्न  बनाकर इसे खाली करवाया।

यहां यह भी लिखना आवश्यक है कि संगीत सदन के प्राचार्य श्री विनोद आचार्य ने इस घटनाक्रम में पर शपथ ली और कहा कि वे संगीत सदन में जब ही कदम करो रखेंगे जब यह भवन पुनः संगीत सदन के पास आ जाएगा। बहरहाल और भी कई सार्वजनिक संपत्तिया हैं। जिनका बुरा हश्र सरकारी नियंत्रण में होने के कारण हुआ है। आशा है कुचामन की आम जनता इन सब के विरोध में आवाज उठाएगी।

About Manoj Bhardwaj

Manoj Bhardwaj
मनोज भारद्धाज एक स्वतंत्र पत्रकार है ,जो समाचार, राजनीति, और विचार-शील लेखन के क्षेत्र में काम कर रहे है । इनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना है और उन्हें उत्कृष्टता, सत्य, और न्याय के साथ जोड़ना है। इनकी विशेषज्ञता समाचार और राजनीति के क्षेत्र में है |

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