
तो लिजीए दोस्तों चलते हैं रणथंबोर यात्रा के भाग दो में । जैसा मैंने कल आपको बताया था कि हम शाम को लगभग 6:00 बजे सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे वहीं पर हमारे मित्र के पी सिंह जी मिल गए उनकी सलाह पर हमने सीता माता के मंदिर में जाना निश्चित किया । क्योंकि अमरेश्वर महादेव का रास्ता बिल्कुल बंद था । तो हमने लगभग 30 व्यक्तियों का शाम का भोजन लिया क्योंकि उस समय हमारे साथ कुचामन के और भी लोग थे तो हमने खाना ज्यादा ही लिया और वही हमारे पुराने मित्र रामलाल जी बैरागी की दो गाड़ियों से हम सीता माता के मंदिर की तरफ रवाना हो गए।

सीता माता पहुंचते ही खुशनुमा मौसम और कल कल बहते झरने झरनों ने हमारा स्वागत दिल खोलकर किया । बहरहाल वहां हमने जमकर खाना खाया । और रात्रि विश्राम किया । सुबह जल्दी ही हम लोग उठ गए और दैनिक क्रिया से निवृत होकर झरनों के नीचे नहाने का हम सभी ने आनंद लिया । जैसा कि आप वीडियो में देख सकते हैं और अंत में तैयार होकर हम निकल पड़े आगे की यात्रा पर ।

लेकिन रुकिए वहां के बंदरों की चंचलता से हम प्रभावित हुए हुए बिना नहीं रह सके और बंदरों को रात्रि की बची हुई बाटिया खिलाई साथ ही वहां उपलब्ध चने भी हमने बंदरों को खिलाएं और फिर वही रामलाल जी बैरागी की दो गाड़ियां हमारे लिए तैयार खड़ी थी । तो हम सभी रवाना हो गए गाड़ियों से अगले पड़ाव की तरफ जी की जी राव जी की बावड़ी की तरफ जाता था और वहां से शुरू होकर जंगल के अंदर प्रवेश ।

वही बैरागी जी ने हमें बीच में काला जी गोरा जी के मंदिर के दर्शन करवाना भी उचित समझा यद्यपि इस पर हमारी तरफ से कोई मांग नहीं थी लेकिन बैरागी जी हमें वहां ले गए और सभी साथियों ने वहां भेरुजी के दर्शन किए । फिर शुरू हुआ दौर नाश्ते का रास्ते में हमने अल्पाहार लिया और पहुंच गए जी राव जी की बावड़ी ।

दोस्तों आगे शुरू होना था जंगल और जंगल में थे हम मात्र 17 व्यक्ति, हम 17 व्यक्तियो के अलावा जंगल में कोई भी नहीं था । तो जंगल की यात्रा का अगला वृतांत कल के एपिसोड में दोस्तों कल का भाग विशेष होने वाला है इस भाग में आपको बताएंगे कि कैसे हमें वहां पर वह फर्जी रेंजर मिले उन्होंने हमसे बदतमीजी की और हम लोगों ने उन्हें अच्छा सबक सिखाया तो धन्यवाद दोस्तों कल तक के लिए इंतजार कीजिए……
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