Saturday , 11 April 2026

निजी स्कुल बनाम सरकारी स्कुल : परिणाम का तुलनात्मक अध्ययन

दोस्तों जैसा आप सभी लोग जानते हैं कि क्विक न्यूज़ में एक नई सीरीज शुरू की है प्राइवेट स्कूल बनाम सरकारी स्कूल। लीजिए पेश है इस सीरिज का दूसरा भाग। दोस्तों निजी स्कूल बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स, प्रलोभन देते बड़े-बड़े वादे। शहर की सारी दीवारे स्कुल विज्ञापनों से पटी हुई। और रिजल्ट देखा जाए तो ओवरऑल  10% से 15% प्राइवेट स्कूल ही अच्छा रिजल्ट दे पाती है। और उनमें से भी 100% रिजल्ट 5% ही स्कूल दे पाती है। 

            बच्चों की पढ़ाई का खर्च मानो आसमान छू रहा हो कमर तोड़ फीस के अलावा महंगी किताबो का बोझ, महंगी यूनिफॉर्म और पूरे सत्र में चार-पांच ऐसे कार्यक्रम जिनका वजन भी विद्यार्थियों के पेरेंट्स को ही वहन करना पड़ता है। साथ ही आने-जाने के लिए बस का खर्चा भी इसी में शामिल है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो सरकारी स्कूल में 100% ट्रेंड स्टाफ पढ़ाता है जो की पूरी तरह से ट्रैण्ड होता है और निजी स्कूलों में अभिभावक जानकारी ले तो 25% स्टाफ भी ट्रेण्ड नहीं मिलेगा।

            पाँचवी तक की कक्षाओं में तो 10 फ़ैल महिलाए भी रख ली जाती है। जबकि इस उम्र में ही बच्चो को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। अभी पिछले दिनों ही एक अध्ययन उजागर हुआ था। वहां स्पष्ट किया गया था कि 90% से ऊपर प्राप्त करने वाले निजी स्कूल के विद्यार्थी सिविल परीक्षा में 40% अंक भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। वहीं दूसरी ओर दैनिक भास्कर ने भी एक अध्ययन किया जिसमें ओवरऑल सरकारी विद्यालय  का परिणाम ही बेहतर है। देखिए दैनिक भास्कर की रिपोर्ट।

              दोस्तों गत सत्र में कड़ाके की ठंड में जब सरकारी छुट्टियां हुई थी तब भी यह निजी स्कूल संचालक अपनी स्कूल खोलते थे। चाहे बच्चों के स्वास्थ्य पर इसका विपरीत प्रभाव ही क्यों ना पड़े। इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। क्विक न्यूज़ ने इस मुद्दे को काफी वजनदार तरीके से उठाया था और उसका असर भी दिखाई दिया था। लेकिन निजी विद्यालय संचालक छुट्टियों के मामले में किसी की भी नहीं सुनते। 

              दोस्तों सरकार द्वारा जो छुट्टियां प्रदान की जाती है बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को मद्दे नजर विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित होती है। इन छुट्टियों से एक स्वस्थ मन और मस्तिष्क का नागरिक तैयार होता है। क्विक न्यूज़ ने भी अपने स्तर पर विशेषज्ञों से बातचीत की तो नतीजा यही निकला कि बच्चों को मानसिक तनाव से बचने के लिए समय-समय पर छुट्टियां होना अनिवार्य है आवश्यक है। आईए सुनते हैं मनो चिकित्सक डॉक्टर सुरेंद्र कुमार जिलोया से क्विक न्यूज़ की बातचीत। 

                  दोस्तों पढ़ाई के बारे में बातचीत आगे वाले एपिसोड में अभी जारी रहेगी। छुट्टियां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। लेकिन निजी विद्यालय की सोच तक पहुंचना मुश्किल है उनके अनुसार बच्चों के दिमाग पर सिर्फ पढ़ाई पढ़ाई और पढ़ाई का बोझ डाले रहो। और कुछ भी नहीं आज की बात यहीं समाप्त होती है दोस्तों आने वाले दिनों में हम बताएंगे किस तरह निजी विद्यालय फीस,कोर्स, ड्रेस,आवागमन के लिए बसें और RTE का दुरुपयोग। RTI का मतलब  शिक्षा का अधिकार राइट टू एजुकेशन राइट टू एजुकेशन के दुरुपयोग की असलियत आप तक पहुंचाएंगे तो कीजिए आने वाले एपिसोड तक इंतजार।

About Manoj Bhardwaj

Manoj Bhardwaj
मनोज भारद्धाज एक स्वतंत्र पत्रकार है ,जो समाचार, राजनीति, और विचार-शील लेखन के क्षेत्र में काम कर रहे है । इनका उद्देश्य समाज को जागरूक करना है और उन्हें उत्कृष्टता, सत्य, और न्याय के साथ जोड़ना है। इनकी विशेषज्ञता समाचार और राजनीति के क्षेत्र में है |

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