
वैवाहिक स्थलों में बजने वाले कान फोड़ू डीजे के संगीत के खिलाफ सभी प्रयासों के विफल होने के पश्चात आज जनता ने अंतत न्यायालय की शरण ली। प्राप्त जानकारी के अनुसार “मानवाधिकार सुरक्षा संगठन राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष” श्री मुन्नालाल काछवाल के अनुसार संचालकों से बार-बार अनुरोधों से बावजूद किए कान फोड़ू संगीत को बंद नहीं किया जाता है, यदि इनसे कहा जाता है तो यह दादागिरी पर उतारू हो जाते हैं। पुलिस को सूचना दिए जाने पर पुलिस के आने पर तो डीजे को बंद कर दिया जाता है लेकिन पुलिस के जाने के तुरंत बाद में डीजे पुन: चालू कर लिया जाता है।

साथ ही किसी भी वैवाहिक स्थल में पार्किंग का ना होना भी एक बहुत बड़ी समस्या है। यातायात तो प्रभावित होता ही है, साथ ही लोगो का अपने घरों में घुसना भी दुभर हो जाता है। आईए जानते हैं श्री मुन्नालाल काछवाल की पीड़ा उन्ही के शब्दों में प्रस्तुत वीडियो में।

मानवाधिकार सुरक्षा संगठन राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष मुन्नालाल काछवाल ने ताल्लुका विधिक सेवा समिति अध्यक्ष एव अपर जिला व सेशन न्यायाधीश सुंदरलाल खरोल के समक्ष प्रिलिटीगेशन पुलिस अधिक्षक डीडवाना-कुचामन, वृताधिकारी कुचामन,थानाधिकारी कुचामन,आयुक्त नगर परिषद कुचामन सहीत विवाह स्थलो के व्यवस्थापको को प्रतिपक्षी बनाते हुये पेश कर बताया की शहर मे सरला बिरला क्ल्याणमंडप,नर्बदा गार्डन,बसंतकुमार बिरला(बारात भवन)कोठारी भवन,न्यु माहेश्वरी भवन सहीत कई विवाह भवन शहर की घनी आबादी मे संचालित हो रहे है जिनमे पार्किंग नही है । आने वाले लोग रास्तो मे गांडिया खडी करके रहवासीयो के लिये घर आने जाने मे परेशानी पैदा कर रहे है ओर मना करने पर हाथापाई करने पर उतारु हो जाते है । देर रात तक कान फोडु संगीत बजाते रहते है जिससे आम जन का जीवन ही दुभर कर रखा है ।

काछवाल ने न्यायालय को बताया की स्थानिय पुलिस प्रशासन को शिकायत देने पर भी कोई कार्यवाही नही करते उल्टा शिकायत कर्ता की पहचान उजागर करके व्यक्तिगत विवाद की स्थिति पैदा कर देते है । उन्होने बताया की न्युकालॉनी के कई वासिंदो ने इस विकराल समस्या के प्रशासन द्वारा निदान नही करने के कारण जिला कल्क्टर के मार्फ़त राष्ट्रपति को ईच्छा मृत्यु की अनुमति देने का प्रार्थना पत्र तक पेश कर दिया ।मोबाइल डीजे का उपयोग निषेध होने के बावजुद पुलिस प्रशासन की मुक सहमति से धड़ल्ले से बजाये रहे है जो कि गर्भस्थ पशुओ व गर्भवती महिलाओं सहित ह्रदय विकार को उत्पन्न करने वाले है ।

गौरतलब है कि पिछले दिनों प्रशासन द्वारा रात 10:00 बजे बाद डीजे बजाने पर पाबंदी लगाई गई थी। और कहां गया था कि बच्चों की बोर्ड की परीक्षा तक रात 10:00 बजे बाद डीजे नहीं बजाया जाए। यहां लगता है प्रशासन यह मानता है कि 10:00 बजे से पहले बच्चे पढ़ते ही नहीं है। और तो और डीजे 10:00 बजे के बाद भी अपने पूरे सबाब पर बजते हैं प्रशासन की अनदेखी के कारण।

बहरहाल तालुका विधिक सेवा समिति अध्यक्ष एवं अपर जिला सेशन न्यायाधीश श्री सुंदरलाल खारोल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कल यानी 10 मार्च को पुलिस अधीक्षक जिला डीडवाना, थाना अधिकारी पुलिस थाना कुचामन सिटी, नगर परिषद आयुक्त व विवाह स्थल संचालकों को नोटिस जारी कर अदालत के समक्ष उपस्थित होने का आदेश जारी किया है। यहां क्विक न्यूज़ न्यायालय से यह आशा करता है कि इस समस्या से जल्द से जल्द आम जन को छुटकारा दिलवाया जाएगा।
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