
अरावली बचाओ आंदोलन का मामला दिन पर दिन तूल पकड़ता जा रहा है। दरअसल दोस्तों 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया। फैसले के अनुसार 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को पहाड़ी क्षेत्र नहीं माना जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा दी गई इस रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला सुनाया। यह फैसला अरावली पर्वतमाला के वजूद पर ही खतरा बनकर टूट पड़ा है। सरल शब्दों में कहा जाय तो सुप्रीम कोर्ट यह कहता है कि 100 मीटर से ऊपर के स्ट्रक्चर को ही अरावली की पहाड़ियां माना जाएगा। यानी अरावली पर्वतमाला का 90% हिस्सा अब अरावली नहीं माना जाएगा। दोस्तों 100086 लगभग अरावली पर्वतमाला में पहाड़िया है,उनमें से सिर्फ 1048 पहाड़ियां 100 मीटर से ऊपर है। यानी 90 फीसदी पहाड़ियों उन पर अब खनन हो सकेगा।

गौरतलब है कि अरावली की पहाड़ियां दिल्ली,हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के लिए फेफड़े साबित होती है। यहां की हरियाली से हम ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं। केंद्र सरकार अपनी तरफ से एक सिफारिश देती है, सुप्रीम कोर्ट इसे मान लेती है और आदेश देती है। आदेश में कहा गया की 100 मीटर से ऊंची जो पहाड़ी होगी उसे ही अरावली की पहाड़ी माना जाएगा। अब इस खतरनाक फैसले के विरोध में लोग मैदान में उतर पड़े हैं। आईए देखते हैं विरोध की कुछ तस्वीरें कुछ वीडियो।

बहरहाल कुचामन सिटी में भी आज लोगों का गुस्सा फुट पड़ा। भगत सिंह युथ ब्रिगेड के नेतृत्व में आज कुचामन के लोगों ने उपखंड अधिकारी के कार्यालय में पहुंचकर अरावली बचाने हेतु राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में आग्रह किया गया कि अरावली को बचाने के लिए राष्ट्रपति स्वयं संज्ञान ले। नारे लगाते हुए उपखंड अधिकारी कार्यालय में लोग पहुंचे और एसडीएम श्री विश्वामित्र मीणा को ज्ञापन सोपा।

ज्ञापन के माध्यम से देश के राष्ट्रपति से अपील की गई कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश पर हस्तक्षेप करते हुए पुनर्विचार किया जाए। ताकि अरावली पर्वतमाला को पूर्ण और प्रभावी कानूनी संरक्षण मिल सके। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो जनहित से जुड़े इस मिशन में वे पीछे नहीं हटेंगे और बड़ा आंदोलन करेंगे ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि केंद्र सरकार की सिफारिश के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश में अरावली की परिभाषा को 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों तक सीमित कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप लगभग 90 प्रतिशत अरावली क्षेत्र कानूनी संरक्षण से बाहर हो गया है। इसे पर्यावरण के लिए गंभीर और दूरगामी दुष्परिणाम वाला निर्णय बताया गया कार्यकर्ताओं ने कहा कि अरावली पर्वतमाला केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच है। यह थार मरुस्थल के विस्तार को रोकने, धूल भरी आंधियों से बचाव करने और भूजल रिचार्ज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि इन पहाड़ियों का संरक्षण नहीं किया गया, तो आने वाला समय देश के लिए भयावह सिद्ध हो सकता है। खनन माफियाओं को लाभ पहुंचाने वाला यह निर्णय जैव विविधता, जलस्तर और वायु गुणवत्ता पर गंभीर असर डालेगा। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि अरावली के दोहन से भूजल स्तर और नीचे जाएगा जिससे जल संकट गहराएगा, वहीं धूल और प्रदूषण में वृद्धि से दिल्ली-एनसीआर सहित पश्चिमी भारत की हवा और अधिक जहरीली हो सकती है।

इस अवसर पर भगतसिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेशअध्यक्ष एवं विश्व जाट महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष परसाराम बुगालिया , तहसील अध्यक्ष झूमर मल बिजारणिया, भगतसिह यूथ ब्रिगेड संस्थान से जुड़े मुननाराम महला, कमलकांत डोडवाडिया, बिरमाराम बांगड़वा और कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष भंवरअली, जिला उपाध्यक्ष शेरखान, पूर्व उपसभापति हेमराज चावला, वरिष्ठ कांग्रेसी दुर्गाराम चौधरी, पार्षद मोहम्मद फारूक टाक, तथा सामाजिक कार्यकर्ता चतुर्भुज शर्मा, रामनिवास मंडा, छिगनाराम बुगालिया, मनोज भारद्वाज, हरीश, हीरालाल, दिनेश भगत, पूरणमल, किशोर डोडवाडिया,सहित विभिन्न संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों व राजनीतिक दलों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

अरावली संरक्षण का विषय केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि राष्ट्र के दीर्घकालिक सुरक्षा का है।
प्रदेश अध्यक्ष परसराम बुगालिया ने बताया कि अरावली के संरक्षण को लेकर उठी यह आवाज न केवल पर्यावरण सुरक्षा की चेतावनी है। बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की गंभीर पुकार भी है यह केवल पर्यावरण का विषय नहीं है बल्कि यह राष्ट्र के दीर्घकालिक सुरक्षा का है। यदि अरावली कमजोर हुई तो इसका दुष्परिणाम केवल राजस्थान को नहीं बल्कि दिल्ली एवं समूचे उत्तर पश्चिमी भारत के भू-भाग पर पड़ेगा जिसने प्रशासन और नीति निर्धारकों का ध्यान एक बार फिर इस संवेदनशील मुद्दे की ओर खींचा है।
यहां दोस्तों क्विक न्यूज़ भी सभी लोगों से आग्रह करता है कि अरावली बचाने के लिए अधिक से अधिक संख्या में आगे आए। यह किसी पार्टी किसी जाति किसी धर्म का मामला नहीं है। यह हम लिए सभी के लिए नुकसान दायक मामला है। इसलिए सभी एक साथ आगे आए है और अरावली बचाने में सभी का सहयोग करें।
दोस्तों क्विक न्यूज़ अपने स्तर पर एक कार्यक्रम चलाने वाला है कुचामन की सभी जनता से आग्रह है कि इस कार्यक्रम में क्विक न्यूज़ का ज्यादा से ज्यादा सहयोग करें। क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों के वजूद पर ही अरावली बचाओ आंदोलन की सफलता निर्भर करती है। कार्यक्रम की रूपरेखा आपको अगले कार्यक्रम में दे दी जाएगी फिलहाल हम कार्यक्रम की रूपरेखा बन रही हैं।
Quick News News as quick as it happens